बांग्लादेश चुनाव: अल्पसंख्यकों में भय का माहौल
ढाका । डेस्क: बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनावों से पहले देश के अल्पसंख्यक समुदायों, विशेषकर हिंदू आबादी में असुरक्षा और चिंता का माहौल बना हुआ है. ऐतिहासिक रूप से चुनावी अवधियों के दौरान होने वाली सांप्रदायिक हिंसा और अगस्त 2024 में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हुई घटनाओं ने अल्पसंख्यकों के मन में गहरे जख्म छोड़े हैं.
बांग्लादेश की कुल आबादी में हिंदू लगभग 8 प्रतिशत हैं, जबकि ईसाई और बौद्ध समुदायों की संख्या बेहद कम है. आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है.
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद (BHBCUC) के आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में कम से कम 522 सांप्रदायिक हमले दर्ज किए गए, जिनमें 61 लोगों की जान गई. वहीं, मानवाधिकार संगठन 'ऐन ओ सालिश केंद्र' ने इसी अवधि में सांप्रदायिक हिंसा की 221 घटनाओं और एक मृत्यु की पुष्टि की है.
इसके विपरीत, अंतरिम सरकार ने इन आंकड़ों को चुनौती देते हुए कहा है कि 2025 में अल्पसंख्यकों से जुड़ी 645 घटनाओं में से केवल 71 ही सांप्रदायिक प्रकृति की थीं, जबकि बाकी सामान्य आपराधिक मामले थे. सरकार का तर्क है कि इन मुद्दों का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिकरण किया जा रहा है.
चुनावों को देखते हुए बीएनपी और जमात-ए-इस्लामी जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों ने अल्पसंख्यक समुदायों तक पहुंच बनाने की कोशिश की है, जिसमें पहली बार हिंदू उम्मीदवार को टिकट देना भी शामिल है.
अंतरिम सरकार के अधिकारियों का दावा है कि इस बार मतदान पूरी तरह सुरक्षित और निष्पक्ष होगा और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए पर्याप्त सुरक्षा बल तैनात किए गए हैं.
हालांकि, जमीनी स्तर पर विश्वास की कमी बरकरार है क्योंकि कई इलाकों में पूर्व की हिंसा के कारण लोगों में अब भी मानसिक खौफ है. चुनाव आयोग पर भी यह आरोप लग रहे हैं कि उसने सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए अल्पसंख्यक संगठनों से पर्याप्त संवाद नहीं किया है.