दमा के इनहेलर से निकलता है कारों के बराबर प्रदूषण
नई दिल्ली । डेस्क: अस्थमा और क्रॉनिक ऑब्स्ट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज जैसी श्वास संबंधी बीमारियां लाखों लोगों को परेशान करती हैं. इन रोगों से जूझ रहे मरीज अक्सर इनहेलर पर पूरी तरह निर्भर हो जाते हैं, लेकिन एक नई रिसर्च ने इस पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि इनहेलरों से निकलने वाला कार्बन और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कारों से होने वाले कार्बन प्रदूषण के बराबर है. यह अध्ययन 'जामा' (JAMA) जर्नल में प्रकाशित हुआ है.
शोध के अनुसार, 2014 से 2024 तक के सर्वे में पाया गया कि हर साल इनहेलरों के कारण लगभग 20 लाख मीट्रिक टन कार्बन वातावरण में घुल जाता है. इसके अलावा, अन्य ग्रीनहाउस गैसें भी उत्सर्जित होती हैं, जो पर्यावरण प्रदूषण को बढ़ावा देती हैं.
शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि इनहेलरों पर अत्यधिक निर्भरता लाभ से ज्यादा नुकसान पहुंचा रही है. खासकर मीटर्ड डोज इनहेलर (एमडीआई) सबसे हानिकारक हैं, क्योंकि इनमें हाइड्रोफ्लोरोअल्केन (एचएफए) नामक हाइड्रोकार्बन गैस निकलती है, जो शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैस है.
ड्राई पाउडर इनहेलर और सॉफ्ट मिस्ट इनहेलर अपेक्षाकृत कम हानिकारक हैं, लेकिन ये भी कुछ कार्बन उत्सर्जन करते हैं.
कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ता विलियम फेल्डमैन ने कहा, "इनहेलरों का इस्तेमाल सावधानी से करें. ब्रांड, प्रभावशीलता, उपयोग का समय और तरीका जानना जरूरी है. बिना सलाह के कोई भी इनहेलर खरीदकर इस्तेमाल करने से बीमारी और गंभीर हो सकती है."
शोधकर्ताओं का सुझाव है कि इनहेलरों का उपयोग कम करें और प्राकृतिक तरीकों से अस्थमा को नियंत्रित करने की कोशिश करें.