मिस्र के हवाई हमले में सूडान के 72 खदान मजदूरों की मौत
नई दिल्ली । डेस्क: सूडान और मिस्र की सीमा पर स्थित एक प्रमुख सोना खदान क्षेत्र पर हुए भीषण हवाई हमले में कम से कम 72 असैन्य मजदूरों की जान चली गई है. सूडान के मानवाधिकार संगठन 'इमरजेंसी लॉयर्स' ने मिस्र की वायुसेना पर इस हमले का आरोप लगाया है. यह घटना दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे सीमा और संसाधन विवाद को एक बार फिर से हवा दे सकती है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पर्वतीय क्षेत्र में हुए इस अचानक हमले के बाद खदान परिसर में भारी अफरा-तफरी मच गई और चारों ओर तबाही का मंजर दिखाई देने लगा.
उत्तरी वादी इलाके में लड़ाकू विमानों की बमबारी
खार्तूम स्थित मानवाधिकार समूह 'इमरजेंसी लॉयर्स' ने सोशल मीडिया के जरिए जानकारी साझा की कि मिस्र के लड़ाकू विमानों ने सूडानी क्षेत्र के भीतर उत्तरी वादी इलाके को निशाना बनाया. प्रारंभिक आंकड़ों के आधार पर इस हमले में कम से कम 72 आम नागरिकों की मौत हुई है. हालांकि, इस हमले की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और मिस्र सरकार या उसकी सेना ने इस पूरे मामले पर फिलहाल कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
चार महीनों के भीतर दूसरा बड़ा हमला
सोना खनन के लिए मशहूर जबल अल-उकैदात के इस दुर्गम पहाड़ी इलाके में इस साल यह दूसरा बड़ा हवाई हमला है. इससे पहले जून के महीने में भी इसी खदान क्षेत्र पर हुए हमलों में 23 मजदूरों की मौत हो गई थी. उस दौरान मिस्र की सेना ने कहा था कि उसने अपनी सीमाओं के भीतर अवैध सोना खनन के खिलाफ एक व्यापक अभियान चलाया है. मिस्र के अनुसार, उस कार्रवाई के दौरान 136 विदेशी नागरिकों सहित 223 लोगों को हिरासत में लिया गया था और इसका उद्देश्य अवैध खनन के साथ-साथ हथियारों की तस्करी को रोकना था.
हलायब ट्राइंगल पर पुराना विवाद और खनिज संसाधन
सूडान और मिस्र की सीमा दशकों से विवादित रही है, जिसमें दोनों देश संसाधन-समृद्ध 'हलायब ट्राइंगल' पर अपना-अपना दावा ठोकते हैं. सूडानी मानवाधिकार संगठन का मानना है कि बार-बार होने वाले ये हमले केवल सुरक्षात्मक कदम नहीं हैं, बल्कि यह सूडान के प्राकृतिक संसाधनों पर नियंत्रण स्थापित करने और अपने प्रभाव का विस्तार करने की मिस्र की मंशा को दर्शाते हैं. दूसरी ओर, मिस्र इसे अपनी सीमा के भीतर की जाने वाली कानूनी और सुरक्षात्मक कार्रवाई करार देता आ रहा है.
सूडानी गृहयुद्ध और बढ़ता सोना खनन संकट
अप्रैल 2023 से सूडानी सेना और अर्द्धसैनिक बल 'रैपिड सपोर्ट फोर्सेज' (आरएसएफ) के बीच चल रहे भयानक गृहयुद्ध ने देश को एक भीषण मानवीय संकट में धकेल दिया है. इस संघर्ष में अब तक 2,00,000 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं. भीषण गरीबी और तबाही के कारण लाखों लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए खतरनाक सोना खनन उद्योग का रुख करने पर मजबूर हुए हैं. लाल सागर से लेकर लीबिया तक फैली 1,200 किलोमीटर लंबी यह सीमा क्षेत्र दशकों से सोने के अवैध व्यापार और मानव तस्करी का गढ़ रहा है, जिसे रोकने के लिए मिस्र लगातार कड़े कदम उठाता रहा है.