विमान के ईंधन के लिये ₹10,000 करोड़ के राहत पैकेज को मंजूरी
नई दिल्ली । डेस्क: पश्चिम एशिया में जारी संकट और हवाई किराए में भारी बढ़ोतरी की आशंकाओं के बीच केंद्र सरकार ने एयरलाइन सेक्टर को एक बड़ी राहत दी है. केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को विमान ईंधन (ATF) की आसमान छूती कीमतों से निपटने के लिए 10,000 करोड़ रुपये के 'प्राइस स्टेबलाइजेशन प्रोग्राम' (मूल्य स्थिरीकरण कार्यक्रम) को मंजूरी दे दी है.
इस फैसले का मुख्य उद्देश्य हवाई यात्रियों को किराए में होने वाली भारी बढ़ोतरी से बचाना और देश में विमानन कनेक्टिविटी को बनाए रखना है.
सरकार की इस योजना के तहत सरकारी तेल विपणन कंपनियों (OMCs) को 10,000 करोड़ रुपये तक का ब्याज मुक्त एडवांस (अग्रिम) दिया जाएगा. इस राशि की मदद से तेल कंपनियां भारतीय एयरलाइंस को एक स्थिर और तय कीमत पर विमान ईंधन की आपूर्ति कर सकेंगी.
यह राहत घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की उड़ानों के लिए लागू होगी.
हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में एटीएफ की कीमतें मार्च के 60.50 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर मई में करीब 142 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं. चूंकि किसी भी एयरलाइन की परिचालन लागत में ईंधन का हिस्सा 40 से 60 फीसदी तक होता है, इसलिए इस मूल्य वृद्धि से विमानन कंपनियों पर वित्तीय संकट मंडरा रहा था.
सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस फैसले की जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिम एशिया संकट और पाकिस्तान द्वारा भारतीय विमानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र (एयरस्पेस) बंद किए जाने के कारण एयरलाइंस को लंबे रूट लेने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन की खपत और खर्च दोनों बढ़ गए हैं.
उन्होंने कहा कि इस संकट के समय में यह फंड एटीएफ की कीमतों को स्थिर रखेगा जिससे विमानन क्षेत्र से जुड़े करीब 77 लाख रोजगार सुरक्षित रहेंगे.
यह व्यवस्था पूरी तरह अस्थायी है और वैश्विक स्तर पर ईंधन की कीमतें सामान्य होने पर तेल कंपनियों से यह राशि वसूल कर वापस भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) में जमा कर दी जाएगी. यह पूरी योजना अगले 36 महीनों तक या फंड की पूरी रिकवरी होने तक लागू रहेगी.