Cong और CPM ने RSS शताब्दी सिक्के, डाक टिकट पर मोदी की आलोचना
नई दिल्ली । डेस्क: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की शताब्दी के उपलक्ष्य में विशेष डाक टिकट और स्मारक सिक्के के जारी होने पर विपक्षी दलों ने तीखी प्रतिक्रिया जताई है. कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर इतिहास को तोड़-मरोड़ने और संविधान को कमजोर करने का आरोप लगाया है.
बुधवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर एक पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी को सरदार वल्लभभाई पटेल के आरएसएस पर दिए गए बयानों की याद दिलाई.
उन्होंने पटेल द्वारा 18 जुलाई 1948 को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को लिखे पत्र का अंश साझा किया, जिसमें पटेल ने कहा था, "आरएसएस और हिंदू महासभा के संबंध में, गांधीजी की हत्या का मामला अदालत में लंबित है और मैं इन दोनों संगठनों की भागीदारी पर कुछ नहीं कहना चाहूंगा, लेकिन हमारी रिपोर्ट्स से पुष्टि होती है कि इन दोनों संगठनों, खासकर पूर्व की गतिविधियों के परिणामस्वरूप देश में ऐसी भयानक त्रासदी संभव हो सकी... आरएसएस की गतिविधियां सरकार और राज्य की अस्तित्व के लिए स्पष्ट खतरा थीं. हमारी रिपोर्ट्स दिखाती हैं कि प्रतिबंध के बावजूद ये गतिविधियां कम नहीं हुईं. वास्तव में, समय के साथ आरएसएस के सदस्य और विद्रोही हो गए हैं और अपनी विध्वंसक गतिविधियों को बढ़ावा दे रहे हैं."
एक अन्य पोस्ट में रमेश ने बताया कि पटेल ने 19 दिसंबर 1948 को जयपुर में एक विशाल सभा को संबोधित करते हुए आरएसएस पर जोरदार प्रहार किया था. हिंदुस्तान टाइम्स की अगले दिन की रिपोर्ट के अनुसार, पटेल ने कहा, "हमारा दृढ़ संकल्प है कि हम आरएसएस या किसी अन्य सांप्रदायिक संगठन को देश को गुलामी या विघटन के रास्ते पर धकेलने की अनुमति नहीं देंगे."
सीपीआई(एम) ने इसे "संविधान के प्रति गंभीर चोट और अपमान" करार दिया, क्योंकि आरएसएस ने कभी संविधान को स्वीकार नहीं किया. पार्टी ने सिक्के पर आरएसएस द्वारा प्रचारित 'भारत माता' की छवि और 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में वर्दीधारी आरएसएस स्वयंसेवकों को दिखाने वाले डाक टिकट पर आपत्ति जताई, इसे इतिहास का विकृतिकरण बताया. पार्टी का कहना है कि सबूतों से पता चलता है कि परेड मुख्य रूप से नागरिक समारोह था और आरएसएस की भागीदारी, यदि कोई थी, तो आकस्मिक और असूचीबद्ध थी.
वामपंथी दल ने सरकार पर आरएसएस के अतीत को सफेद करने का आरोप लगाया, दावा किया कि संगठन स्वतंत्रता संग्राम से दूर रहा और ब्रिटिश 'फूट डालो और राज करो' की रणनीति को मजबूत किया. पार्टी ने आरएसएस की सांप्रदायिक हिंसा में भूमिका और अल्पसंख्यक व हाशिए पर पड़े समुदायों को निशाना बनाने का जिक्र किया.
सीपीआई(एम) महासचिव एम.ए. बेबी ने लिखा कि आरएसएस की महिमा करने वाला सिक्का और टिकट संविधान का अपमान है और भारत के स्वतंत्रता संग्राम को विकृत करता है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के इस कदम ने उनके संवैधानिक पद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है.
उधर, प्रधानमंत्री मोदी ने बुधवार को ही आरएसएस की राष्ट्र-निर्माण में भूमिका की सराहना की.
उन्होंने कहा कि संगठन ने हमेशा राष्ट्र को प्राथमिकता दी और स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वयंसेवकों व नेताओं के बलिदान का उल्लेख किया.
मोदी ने कहा कि संघ को झूठे मुकदमों, प्रतिबंधों और दमन के प्रयासों का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने कड़वाहट नहीं पाली. उन्होंने आरएसएस के सामाजिक योगदान और 'राष्ट्र पहले' के सिद्धांत की प्रशंसा की.
स्मारक सिक्के पर आरएसएस का मंत्र "राष्ट्राय स्वाहा, इदम राष्ट्राय, इदम न मम" अंकित है, जिसका अर्थ है "सब कुछ राष्ट्र को समर्पित, सब राष्ट्र का है, कुछ भी मेरा नहीं."
डाक टिकट पर 1963 के गणतंत्र दिवस परेड में आरएसएस स्वयंसेवकों की भागीदारी दर्शाई गई है, जो सरकार के अनुसार संगठन के ऐतिहासिक योगदान को रेखांकित करती है.
मोदी ने आरएसएस को एक ऐसा संगठन बताया जो आरोपों, प्रतिबंधों और चुनौतियों के बावजूद राष्ट्र सेवा में लगा रहा और राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि रखता है.