महिला वोटरों को ‘टार्गेट’ कर नाम काटे जा रहे हैं: ममता बनर्जी
कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने वोटर लिस्ट से महिलाओं के नाम जानबूझकर हटाए जाने का आरोप लगाते हुए चुनाव आयोग और केंद्र पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. मंगलवार को नवान्न में आयोजित पत्रकार सम्मेलन में ममता ने कहा कि शादी के बाद ससुराल जाने वाली, उपनाम बदलने वाली और स्थानांतरित महिलाओं को ‘टार्गेट’ कर वोटर सूची से बाहर किया जा रहा है. उन्होंने इसे लोकतंत्र पर सीधा हमला बताया.
मुख्यमंत्री ने महिला वोटरों, नए मतदाताओं, प्रवासी मजदूरों और स्थानांतरित नागरिकों से अपील की कि वे बीएलओ और एआरओ से संपर्क कर पूछें कि उनका नाम क्यों काटा गया और दस्तावेज़ देने के बावजूद रसीद क्यों नहीं दी जा रही.
ममता बनर्जी ने यह भी दावा किया कि बिहार, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों से पश्चिम बंगाल की वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने की साजिश चल रही है. साथ ही उन्होंने कहा कि कई लोगों के नाम ब्लॉक कर दिए गए हैं और उन्हें सुनवाई का मौका तक नहीं दिया जा रहा.
डोमिसाइल सर्टिफिकेट स्वीकार न किए जाने और माइक्रो ऑब्ज़र्वरों की नियुक्ति को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए.
मुख्यमंत्री का कहना था कि विशेष रूप से महिला वोटर तृणमूल कांग्रेस की जनसमर्थन की मजबूत आधार रही हैं और 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले उन्हें अधिकारों के प्रति सतर्क करने के लिए यह चेतावनी जरूरी है.
मतुआ समुदाय के संदर्भ में भी ममता ने कहा कि उनके अधिकार छीने जा रहे हैं और चुनाव लोकतंत्र का उत्सव है, जिसमें जनता को स्वतंत्र रूप से फैसला करने दिया जाना चाहिए.
इस बीच, नवान्न की प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तृणमूल का थीम गीत बजने को लेकर विपक्ष ने भी सवाल उठाए हैं. नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने इसे प्रशासनिक मंच के दुरुपयोग का उदाहरण बताया.