क्या BJP में शामिल होंगे शशि थरूर?
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस पार्टी के सांसद शशि थरूर को लेकर पार्टी के भीतर असहजता बढ़ती जा रही है. थरूर अपनी ही पार्टी लाइन के विपरीत चलकर लगातार ऐसे काम कर रहे हैं, जिससे कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ रही हैं. तमाम बहानों से पार्टी की बैठकों में शामिल न होना, हाल ही में संसदीय दल की बैठक से भी अनुपस्थित रहना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा उनकी सरकार की लगातार प्रशंसा करना, थरूर को धीरे-धीरे अपनी पार्टी से दूर ले जा रहा है.
पिछले कुछ महीनों से थरूर लगातार मोदी सरकार के पक्ष में बयान दे रहे हैं. प्रधानमंत्री मोदी और थरूर के बीच बढ़ती 'नजदीकी' चर्चा का विषय बनी हुई है, जहाँ दोनों सार्वजनिक रूप से एक-दूसरे की प्रशंसा कर रहे हैं. कांग्रेस को दरकिनार कर प्रधानमंत्री मोदी ने थरूर को विभिन्न जिम्मेदारियाँ भी दी हैं.
हाल ही में केरल के स्थानीय चुनावों में थरूर के संसदीय क्षेत्र तिरुवनंतपुरम में भाजपा की जीत ने उनके स्टैंड पर सवाल खड़े कर दिए हैं. केरल कांग्रेस के नेताओं का मानना है कि प्रचार करने के बावजूद थरूर ने पार्टी की जीत के लिए कुछ नहीं किया, बल्कि अपने समर्थकों को भाजपा को वोट देने के लिए प्रोत्साहित किया. उन्होंने भाजपा की जीत पर बधाई भी दी थी.
सबसे ताजा विवाद तब खड़ा हुआ जब केंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलकर 'विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण)' या संक्षेप में 'जीरामजी' कर रही है. जब पूरा विपक्ष इस नाम बदलने के प्रस्ताव पर मोदी सरकार की आलोचना कर रहा है, तब थरूर ने एक तरह से सरकार का पक्ष लिया. उन्होंने कहा कि मनरेगा का नाम बदलने को लेकर विवाद दुर्भाग्यपूर्ण है और महात्मा गांधी के नाम को हटाना उनके 'गहन सह-अस्तित्व' की अवहेलना है. उनके इस बयान को पार्टी के नेता भाजपा नेताओं जैसी भाषा बता रहे हैं.
पिछले एक साल में थरूर ने 'वंशवाद' पर लेख लिखकर, इंदिरा गांधी के आपातकाल पर निबंध लिखकर और 'ऑपरेशन सिंदूर' की प्रशंसा करके पार्टी को बार-बार असहज किया है. उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की 'ज़ीरो टॉलरेंस' नीति को उजागर करने के लिए पाँच देशों में एक राजनयिक प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भी किया था, जिसकी भाजपा नेताओं ने प्रशंसा की थी.
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि थरूर हाल ही में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के सम्मान में राष्ट्रपति द्वारा आयोजित रात्रिभोज में शामिल हुए थे, जबकि उनके पार्टी के नेता और लोकसभा तथा राज्यसभा में विपक्ष के नेता, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे को आमंत्रित ही नहीं किया गया था.
इन तमाम घटनाक्रमों के बाद अब यह सवाल जोर पकड़ रहा है कि क्या मोदी की 'गुड बॉय' लिस्ट में शामिल शशि थरूर जल्द ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले हैं?