क्या भविष्य में 25 घंटे का होगा दिन? धीमी हो रही है पृथ्वी की रफ्तार
नई दिल्ली । डेस्क: हम रोज़ जिस 24 घंटे के दिन को मानकर अपनी ज़िंदगी चलाते हैं, वह दरअसल बिल्कुल स्थिर नहीं है. वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी अपने अक्ष पर एक चक्कर पूरा करने में लगभग 23 घंटे 56 मिनट 4 सेकेंड लेती है. इसी फर्क की भरपाई के लिए हर चार साल में एक अतिरिक्त दिन जोड़कर लीप ईयर बनाया जाता है.
लेकिन अब वैज्ञानिकों ने एक और अहम तथ्य पर ध्यान दिलाया है पृथ्वी की घूर्णन गति धीरे-धीरे कम हो रही है. इसका सबसे बड़ा कारण है चाँद. चाँद के गुरुत्वाकर्षण से समुद्र में ज्वार-भाटा आता है और इसी प्रक्रिया में पृथ्वी की घूर्णन गति पर हल्का-सा “ब्रेक” लग रहा है.
वैज्ञानिक बताते हैं कि ज्वार-भाटे के दौरान समुद्र की विशाल जलराशि में होने वाला घर्षण पृथ्वी की रफ्तार को बहुत धीरे-धीरे कम करता है. इस प्रक्रिया में चाँद खुद भी पृथ्वी से थोड़ा-थोड़ा दूर खिसक रहा है.
हालाँकि आम लोगों को इसका कोई असर महसूस नहीं होता. यह बदलाव सेकेंड के बेहद छोटे हिस्सों में होता है. इन सूक्ष्म अंतर को मापने के लिए वैज्ञानिक ‘लीप सेकेंड’ का इस्तेमाल करते हैं, ताकि पृथ्वी की वास्तविक गति और घड़ियों के समय में तालमेल बना रहे.
क्या कभी 25 घंटे का दिन आएगा? वैज्ञानिकों के अनुसार सैद्धांतिक रूप से यह संभव है, लेकिन इसके लिए कम से कम 20 करोड़ साल लग सकते हैं. यानी निकट भविष्य में न तो हमारी घड़ियाँ बदलेंगी और न ही कैलेंडर.
चाँद के अलावा जलवायु परिवर्तन, बर्फ की विशाल चट्टानों का पिघलना और पृथ्वी के भीतर भारी द्रव्यमान का खिसकना भी घूर्णन गति को प्रभावित कर सकता है. फिलहाल यह बदलाव विज्ञान के लिए शोध का विषय है, आम जीवन के लिए चिंता की बात नहीं.
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