MP में विलुप्त हुए जंगली भैंसे असम से आयेंगे
छत्तीसगढ़ गठन के बाद MP से विलुप्त हुए जंगली भैंसे असम से आयेंगे
भोपाल । डेस्क: मध्य प्रदेश अपनी वन्यजीव संपदा को और समृद्ध करने के उद्देश्य से उस प्रजाति को वापस लाने जा रहा है, जिसे 25 साल पहले छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के समय उसने खो दिया था. वर्ष 2000 में जब मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से को काटकर छत्तीसगढ़ बनाया गया, तब जंगली भैंसों (Wild Buffalo) वाले प्रमुख वन क्षेत्र नए राज्य का हिस्सा बन गए थे.
अब मध्य प्रदेश सरकार वाइल्डलाइफ इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया की व्यवहार्यता रिपोर्ट के आधार पर कान्हा नेशनल पार्क में इन जंगली भैंसों को पुनर्जीवित करने की योजना बना रही है.
इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए मध्य प्रदेश और असम सरकार के बीच एक समझौता (MoU) हुआ है, जिसके तहत वन्यजीवों की अदला-बदली की जाएगी. मध्य प्रदेश अपने दो बाघ असम को देगा और बदले में असम के काजींरगा से 50 जंगली भैंसे, दो गैंडे और कोबरा सांप राज्य में लाए जाएंगे.
जंगली भैंसों की पहली खेप फरवरी-मार्च तक कान्हा पहुंचने की उम्मीद है, जिन्हें शुरुआत में सुपखार रेंज की हलोन घाटी में 120 हेक्टेयर के बाड़े में रखा जाएगा. ऐतिहासिक रूप से हलोन घाटी में जंगली भैंसों की मौजूदगी रही है, जिसका उल्लेख कैप्टन जेम्स फोर्सिथ जैसे लेखकों की किताबों में भी मिलता है.
वन विभाग के अधिकारियों का मानना है कि जंगली भैंसों की वापसी से कान्हा के घास के मैदानों के संरक्षण में बड़ी मदद मिलेगी. हालांकि, विशेषज्ञों ने घरेलू भैंसों से फैलने वाली बीमारियों और नस्ल के संकरण को लेकर चुनौती भी जताई है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ ने जंगली भैंसे को अपना राजकीय पशु घोषित किया है और वहां भी इनके संरक्षण के लिए क्लोनिंग जैसे प्रयास किए गए हैं. मध्य प्रदेश इससे पहले पन्ना में बाघों, सतपुड़ा में बारहसिंगा और कूनो में चीतों के सफल पुनर्वास के माध्यम से वन्यजीव संरक्षण में अपनी साख मजबूत कर चुका है.