क्या वाकई ईरान परमाणु बम बनाने के निकट है?
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान पर ईजराइली हमले के इतने दिनों बाद सवाल उठता है क्या वाकई ईरान परमाणु बम बनाने के निकट है. इसी परमाणु बम का नाम लेकर भी अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आग उगल रहे हैं.
कहीं ईरान पर लगाये आरोप भी ईराक के समान न निकले. ईराक पर भी आरोप लगाया गया था कि उसके पास विध्वंस के हथियार हैं परन्तु कुछ न मिला था. बल्कि, पश्चिमी देशों ने ईराक के तेल के कुओं पर कब्जा करके आपस में बांट लिया था.
ईरान में भी तेल के कुयें पर परन्तु यहां मामला दूसरा है. इजराइल तथा अमरीका चाहते हैं कि ईरान में सत्ता परिवर्तन हो, अयातुल्ला अली खामनेई को बेदखल किया जाये. लेकिन क्या इस बेदखली के बाद भी वहां पहलवी शासन के समान सरकार सत्ता में आ पायेगी. हालात तो इस ओर इशारा नहीं करते हैं.
हालांकि इस बात की गारंटी डॉनल्ड ट्रंप या नेतन्याहू में से कोई नहीं ले सकता कि खामेनेई को हटाने से समस्या का समाधान हो जायेगा. यह कैसे कहा जा सकता है कि नई सत्ता को न्यूक्लियर ताकत बनने में कोई दिलचस्पी नहीं होगी, वह भी जब उसके पास अमरीका और ईजराइल के हिसाब से जरूरी साधन मौजूद हैं.
दुनिया में कुछ मुट्ठी भर देशों के पास परमाणु हथियार हैं. इसमें ब्रिटेन, अमरीका, रूस, चीन, फ्रांस, भारत, पाकिस्तान और उत्तर कोरिया शामिल है.
यह माना जाता है कि इजराइल के पास भी परमाणु हथियार हैं लेकिन न तो वह इसकी पुष्टि करता है और न ही इस बात से इनकार करता है. फिर ऐसा क्यों है कि कुछ देश ही परमाणु हथियार रख सकते हैं और कोई अन्य इसे नहीं रख सकता है.
1968 में हुए परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) के अनुसार और कोई देश परमाणु हथियार नहीं रख सकता है. क्योंकि परमाणु हथियार मानवता के लिये खतरा है तथा जिस देश में परमाणु हथियार है वहां पर सत्तासीन कौन है वह लाख टके का सवाल होता है.
बहरहाल, परमाणु बम का नाम लेकर ईरान पर इजराइल बम बरसा रहा है तो अमरीका मुंह से आग के गोले छोड़ रहा है. ईरान भी पीछे हटता नज़र नहीं आ रहा है. ऐसे में इस युद्ध का खात्मा कैसे होगा यह देखना है.
खामेनेई के ट्वीट वायरल
इस बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को कट्टर बताने की कोशिशों के बीच उनका वीडियो वायरल हो रहा है, जिसमें खामेनेई महिला अधिकारों की बात कर रहे हैं.
एक दशक से अधिक पुराने पोस्टों में, खामेनेई को महिला अधिकारों के लिए बोलते हुए, कविता के प्रति प्रेम दिखाते हुए, ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन के प्रति सहानुभूति जताते हुए और यहां तक कि एक "शरारती और चंचल" स्कूली बच्चे होने की बात स्वीकार करते हुए देखा जा सकता है.
एक ट्वीट में लिखा गया है: "पुरुष की जिम्मेदारी है कि वह महिला की जरूरतों और भावनाओं को समझे और उसकी भावनात्मक स्थिति के प्रति लापरवाह न हो."