'हमने हिंसा नहीं सत्याग्रह चुना', फ्रांस के उपद्रव से तुलना पर बोले CJP प्रमुख
CJP नेताओं की गिरफ्तारी के बाद अभिजीत दीपके ने समर्थकों से हिंसा का रास्ता न चुनने की अपील की है. उन्होंने कहा कि सौरव दास और आशुतोष रांका ने जेल जाना स्वीकार किया, लेकिन नफरत और टकराव का रास्ता नहीं अपनाया.
नई दिल्ली । डेस्क: विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने आंदोलन के पूरी तरह शांतिपूर्ण रहने की प्रतिबद्धता दोहराई है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फ्रांस, नेपाल और बांग्लादेश में हुए हिंसक उपद्रवों के साथ भारत के इस आंदोलन की तुलना किए जाने पर दीपके ने कड़ा रुख अपनाया है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत में लोकतंत्र और अहिंसा की जड़ें गहरी हैं और CJP का यह संघर्ष महात्मा गांधी के सत्याग्रह के सिद्धांतों पर आधारित है.
अपने दो शीर्ष सहयोगियों—सौरव दास और आशुतोष रांका—की गिरफ्तारी पर बात करते हुए दीपके ने कहा कि दोनों नेताओं ने बिना किसी नफरत या टकराव के हंसते-हंसते जेल जाना स्वीकार किया है.
उन्होंने विरोधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि भारत की तुलना फ्रांस की हिंसक घटनाओं से नहीं की जा सकती, क्योंकि यहाँ न्याय और शांति की लड़ाई सत्याग्रह के रास्ते पर लड़ी जा रही है. दीपके के अनुसार, 13 अक्टूबर से जेल में बंद दोनों नेता रिहाई के बाद भी अहिंसा के इसी रास्ते पर आगे बढ़ेंगे.
प्रदर्शनकारियों और समर्थकों को संबोधित करते हुए दीपके ने अपील की कि वे अपने भीतर गुस्सा और नफरत न पनपने दें.
उन्होंने कहा, "हम नफरत के खिलाफ लड़ रहे हैं, इसलिए हमें वह नहीं बनना है जिससे हम नफरत करते हैं." त्योहारों के इस मौसम में उन्होंने कार्यकर्ताओं से अपने परिवारों के साथ समय बिताने और साथ ही जेल में बंद नेताओं के बलिदान को याद रखने का आग्रह किया. दीपके ने कहा कि कठिनाइयों और उकसावे के बावजूद आंदोलन का सबसे बड़ा हथियार शांति, करुणा और भावनात्मक एकजुटता ही रहेगा.