बहरेपन के इलाज में क्रांति ला सकती है वियाग्रा !
नई दिल्ली । डेस्क: पुरुषों में यौन उत्तेजना बढ़ाने वाली दवा वियाग्रा (Viagra), जिसे सिल्डेनाफिल (Sildenafil) के नाम से भी जाना जाता है, अब एक गंभीर बीमारी जन्मजात बहरेपन के इलाज में नई उम्मीद जगा रही है. वैज्ञानिकों ने एक शोध में पाया है कि यह दवा एक खास तरह की बहरेपन की समस्या को ठीक करने में मददगार हो सकती है, यहां तक कि जन्म से होने वाली श्रवण हानि को भी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह खोज सफल होती है, तो चिकित्सा विज्ञान में एक बड़ी क्रांति आएगी.
दुनिया भर में हर 2,000 बच्चों में से लगभग तीन बच्चे सुनने की समस्या के साथ पैदा होते हैं. जन्मजात बहरेपन का इलाज अब तक लगभग असंभव माना जाता था, जिसके कारण इन लोगों को जीवन भर मूक-बधिर बनकर रहना पड़ता है. नए शोध ने इसी समस्या के समाधान की दिशा में रोशनी दिखाई है.
'जर्नल ऑफ क्लिनिकल इन्वेस्टिगेशन' में प्रकाशित इस शोध के अनुसार, एक दुर्लभ श्रवण दोष के पीछे तीन आनुवंशिक परिवर्तन जिम्मेदार होते हैं. शोधकर्ताओं की एक अंतर्राष्ट्रीय टीम ने 'जीन सीक्वेंसिंग' के जरिए उस खास जीन की पहचान की है जो कार्बोक्सीपेप्टिडेस डी (CPD) नामक एक एंजाइम को एनकोड करता है. इसी जीन में हुए महत्वपूर्ण परिवर्तनों के कारण सुनने की क्षमता बाधित होती है.
तुर्की के तीन ऐसे परिवारों में पाए गए जन्मजात बहरेपन से पीड़ित लोगों पर अध्ययन किया गया, जिनका आपस में कोई संबंध नहीं था, लेकिन उनमें CPD जीन का यह दुर्लभ रूप मौजूद था. वैज्ञानिकों ने विश्लेषण में पाया कि यह जीन परिवर्तन दरअसल एमिनो एसिड आर्जिनिन के उत्पादन को रोकता है, जिससे तंत्रिका तंत्र के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण नाइट्रिक ऑक्साइड नहीं बन पाता. नाइट्रिक ऑक्साइड की कमी से कान के अंदर की संवेदनशील कोशिकाएं मर जाती हैं, जिससे बहरापन आ जाता है. चूहे और मक्खियों पर किए गए प्रयोगों में भी यही परिणाम मिले.
शोधकर्ताओं ने प्रायोगिक रूप से मृत कोशिकाओं में आर्जिनिन की मात्रा बढ़ाई, जिससे नाइट्रिक ऑक्साइड का स्तर फिर से बढ़ गया और कोशिकीय तनाव कम हो गया. वैज्ञानिकों का मत है कि यह प्रक्रिया वियाग्रा (सिल्डेनाफिल) के जरिए भी संभव है. शिकागो विश्वविद्यालय के न्यूरोसाइंटिस्ट डॉ. रोंग ग्रेस ज़ाई ने इस खोज को 'बहुत रोमांचक' बताया है, क्योंकि इससे बहरेपन से जुड़ा एक नया जीन म्यूटेशन सामने आया है और सबसे बड़ी बात, इस समस्या का संभावित समाधान भी मिला है.
जहां दुनिया के कई हिस्सों में अब जीन थेरेपी से बहरेपन का इलाज शुरू हो गया है, वहीं वैज्ञानिक अब वियाग्रा के उपयोग से मिलने वाले समाधान पर भी काम कर रहे हैं. नई रिसर्च के बाद वैज्ञानिक इस सस्ती और आसानी से उपलब्ध दवा के प्रयोग को लेकर काफी आशावादी हैं. वैसे वियाग्रा का उपयोग पल्मोनरी हाइपरटेंशन जैसे जानलेवा रोग में भी किया जा रहा है तथा इससे मरीजों को नई जिंदगी मिली है.