VB-G RAM G एक्ट 'रोजगार अधिकार चोरी': जयराम रमेश
नई दिल्ली । डेस्क: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए नए कानून 'विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण)' यानी VB-G RAM G एक्ट को लेकर तीखा हमला बोला है. उन्होंने इस नए कानून को "रोजगार अधिकार चोरी" करार देते हुए दावा किया कि इसने दो दशक पुराने मनरेगा (MGNREGA) के तहत मिले काम के संवैधानिक अधिकार को खत्म कर दिया है.
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जम्मू-कश्मीर के पूर्व वित्त मंत्री और जाने-माने अर्थशास्त्री हसीब द्राबू के एक लेख का हवाला देते हुए सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि जहां मनरेगा ने ग्राम पंचायतों को सशक्त बनाया था और ग्रामीणों को कानूनी रूप से काम की गारंटी दी थी, वहीं इस नए कानून के जरिए एक अत्यधिक केंद्रीकृत व्यवस्था थोप दी गई है.
इससे राज्य सरकारों पर असहनीय वित्तीय बोझ पड़ेगा.
उन्होंने आरोप लगाया कि नए कानून में तकनीक का इस्तेमाल आम लोगों की मदद के लिए नहीं, बल्कि उन्हें योजना से बाहर रखने (एक्सक्लूड करने) के लिए किया जा रहा है. साथ ही, यह योजना मनरेगा की तरह साल भर चलने वाली भी नहीं है.
हसीब द्राबू के लेख का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि मनरेगा एक अधिकार-आधारित और मांग-संचालित योजना थी, जो परिवारों को 100 दिनों के अकुशल कार्य का कानूनी अधिकार देती थी. अब इसे एक फार्मूला-आधारित और केंद्र द्वारा तय किए जाने वाले ट्रांसफर में बदल दिया गया है.
गौरतलब है कि दो दशक पुराने मनरेगा कानून को बदलकर 1 जुलाई से देश भर में नया VB-G RAM G एक्ट लागू किया गया है. कांग्रेस ने इस नए कानून को तुरंत वापस लेने और एक मजबूत मनरेगा को फिर से लागू करने की मांग की है.
मुख्य विपक्षी दल का कहना है कि नए कानून के तहत मिलने वाली मजदूरी बेहद कम और अन्यायपूर्ण है. कांग्रेस ने मांग की है कि देश के श्रमिकों के लिए साल 2019 की डॉ. अनूप सत्पथी विशेषज्ञ समिति की सिफारिशों और उसके बाद बढ़ी महंगाई के आधार पर एक न्यायसंगत न्यूनतम मजदूरी तय की जानी चाहिए.