खामेनेई की मौत से गमगीन यूपी के बाराबंकी का किंतूर गांव
बाराबंकी । डेस्क: उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले का एक छोटा सा गांव 'किंतूर' इन दिनों वैश्विक चर्चा का केंद्र बना हुआ है. ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हालिया मृत्यु की खबर ने इस गांव में मातम का माहौल पैदा कर दिया है.
उल्लेखनीय है कि किंतूर गांव का ईरान के इस्लामी शासन से गहरा पुश्तैनी नाता है. यह ईरान के पहले सर्वोच्च नेता, अयातुल्ला रुहोल्ला खुमैनी के दादा, सैयद अहमद मूसवी हिंदी का जन्मस्थान है. वर्ष 1834 में ब्रिटिश शासन से क्षुब्ध होकर हिंदी ईरान चले गए थे और बाद में वहीं बस गए, जहाँ 1902 में खुमैनी का जन्म हुआ.
खामेनेई की मौत के बाद किंतूर के निवासियों ने एक सप्ताह के शोक की घोषणा की है. गांव के घरों पर काले झंडे लगा दिए गए हैं और ग्रामीणों ने इस वर्ष होली का त्योहार न मनाने का निर्णय लिया है.
खुमैनी के वंशज होने का दावा करने वाले सैयद निहाल अहमद काजमी और सैयद रेहान काजमी ने बताया कि यह क्षति पूरे शिया समुदाय के लिए अपूरणीय है.
गांव में हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश करते हुए स्थानीय निवासी राकेश कुमार ने बताया कि खमेनेई की याद में प्रतिदिन शोक सभाएं आयोजित की जा रही हैं.