होर्मुज में अमेरिकी नौसेना का माइन-स्वीपिंग ऑपरेशन
नई दिल्ली । डेस्क: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और वैश्विक ऊर्जा संकट के बीच अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य में बिछाई गई समुद्री सुरंगों को हटाने के लिए एक व्यापक और आधुनिक सैन्य अभियान शुरू कर दिया है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद से इस रणनीतिक जलमार्ग में जहाजों की आवाजाही बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर में ईंधन की आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है.
इस संकट को सुलझाने के लिए अमेरिकी नौसेना अब अपने आधुनिक हथियारों, अंडरवाटर ड्रोन और विस्फोटक रोबोट्स के साथ मैदान में उतर चुकी है. हालांकि, पूर्व नौसेना अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि अत्याधुनिक तकनीक के बावजूद यह प्रक्रिया बेहद धीमी और जोखिम भरी होगी, क्योंकि माइन-स्वीपिंग टीमों पर ईरानी हमलों का खतरा लगातार बना हुआ है.
पेंटागन के अनुसार, इस ऑपरेशन में मानव रहित प्रणालियों को प्राथमिकता दी जा रही है ताकि जोखिम को कम किया जा सके. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में दावा किया था कि ईरान के सुरंग बिछाने वाले सभी जहाजों को नष्ट कर दिया गया है, लेकिन विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तेहरान अभी भी अतिरिक्त उपकरण तैनात कर सकता है.
होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरंग युद्ध बेहद प्रभावी साबित हो रहा है क्योंकि ये उपकरण सस्ते हैं, लेकिन इन्हें हटाना काफी महंगा और समय लेने वाला काम है. एक सेवानिवृत्त ब्रिटिश नौसेना अधिकारी के अनुसार, केवल एक सुरंग क्षेत्र का डर ही वाणिज्यिक जहाजों को रोकने के लिए पर्याप्त होता है.
वर्तमान में अमेरिकी बेड़े में पारंपरिक जहाजों की जगह अब 'लिटोरल कॉम्बैट शिप्स' ले रहे हैं, जो स्वायत्त सतह और पानी के नीचे चलने वाले ड्रोनों से लैस हैं. ये रोबोट चालक दल को सुरक्षित दूरी पर रखते हुए सुरंगों का पता लगाने और उन्हें नष्ट करने में सक्षम हैं.
ईरान के पास कई प्रकार की समुद्री सुरंगें होने का अनुमान है, जिनमें समुद्र तल पर टिकी 'बॉटम माइन्स', सतह के पास तैरने वाली 'टीथर्ड माइन्स' और जहाजों के निचले हिस्से से चिपकने वाली 'लिम्पेट माइन्स' शामिल हैं. इनसे निपटने के लिए अमेरिका 'आर्चरफिश' जैसे उपकरणों का उपयोग कर रहा है.
यह 2 मीटर लंबा टॉरपीडो के आकार का एक रिमोट-संचालित उपकरण है, जो फाइबर केबल के माध्यम से वीडियो फीड भेजता है और सीधे सुरंग से टकराकर उसे नष्ट कर देता है.
इसके अलावा, मानवरहित नावें भी तैनात की जा रही हैं जो मलबे को साफ करने या विस्फोटों को ट्रिगर करने वाले स्लेज को खींचती हैं. हालांकि, तकनीक कितनी भी उन्नत क्यों न हो, इस पूरे जलमार्ग को साफ करने में कम से कम दो से तीन सप्ताह का समय लग सकता है.
भविष्य की ओर देखते हुए, फ्रांस की थेल्स जैसी कंपनियां ऐसी एआई-आधारित और उन्नत सोनार तकनीक विकसित कर रही हैं, जो एक ही बार में कई कोणों से सुरंगों का स्कैन कर सकती हैं.
लक्ष्य एक ऐसी स्वायत्त प्रणाली बनाना है जो बिना मानवीय हस्तक्षेप के सुरंगों को खोजे, उनकी पहचान करे और उन्हें नष्ट कर दे.
फिलहाल, अमेरिकी एडमिरल डेरिल कॉडल ने स्वीकार किया है कि सुरंगों को ढूंढना और नष्ट करना एक थकाऊ प्रक्रिया है जो सैन्य क्षमताओं को संवेदनशील बनाती है. जैसे-जैसे यह ऑपरेशन आगे बढ़ रहा है, पूरी दुनिया की नजरें होर्मुज पर टिकी हैं, क्योंकि इस मार्ग की सुरक्षा ही वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों की स्थिरता का मुख्य आधार है.