अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट: 2027 तक ताइवान पर चीनी हमले की योजना नहीं
वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिकी खुफिया एजेंसियों के नवीनतम आकलन ने ताइवान और चीन के बीच बढ़ते तनाव को लेकर एक महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है. बुधवार को जारी '2026 एनुअल थ्रेट असेसमेंट' के अनुसार, अमेरिकी खुफिया समुदाय का मानना है कि चीन फिलहाल 2027 तक ताइवान पर सैन्य आक्रमण करने की योजना नहीं बना रहा है.
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि यद्यपि चीन ताइवान पर नियंत्रण पाने के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य पर अडिग है, लेकिन बीजिंग ने इस एकीकरण को प्राप्त करने के लिए अभी तक कोई निश्चित समय सीमा तय नहीं की है.
वाशिंगटन के नीतिगत हलकों में अक्सर 2027 को एक अनौपचारिक समय सीमा माना जाता रहा है, क्योंकि ऐसा अनुमान था कि तब तक चीनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) ताइवान पर हमला करने की पूरी सैन्य क्षमता हासिल कर लेगी.
हालांकि, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट का कहना है कि सैन्य क्षमता होने का मतलब यह कतई नहीं है कि बीजिंग आक्रमण ही करेगा.
रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी नेतृत्व किसी भी सैन्य कार्रवाई का फैसला करने से पहले कई कारकों पर विचार करेगा, जिनमें पीएलए की युद्ध तत्परता, ताइवान की आंतरिक राजनीति और सबसे महत्वपूर्ण यह कि क्या अमेरिका इस संघर्ष में सैन्य रूप से हस्तक्षेप करेगा.
रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि चीन की सेना 'स्थिर लेकिन असमान प्रगति' कर रही है, और ताइवान के आसपास हालिया सैन्य युद्धाभ्यास के बावजूद, चीनी नेतृत्व के लिए अभी भी बहुत सारे जोखिम मौजूद हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि चीन अब भी बल प्रयोग के बजाय 'शांतिपूर्ण एकीकरण' को प्राथमिकता देता है.
जर्मन मार्शल फंड की बोनी ग्लेसर जैसे विशेषज्ञों ने इस आकलन का समर्थन करते हुए कहा है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग के पास कोई निश्चित टाइमलाइन नहीं है. उन्होंने चीनी सेना के भीतर भ्रष्टाचार विरोधी अभियानों के कारण हाल ही में हुए अधिकारियों के 'शुद्धिकरण' का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में अगले कुछ वर्षों में सैन्य विकल्प की संभावना कम ही है.
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि यदि ताइवान पर हमला होता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए विनाशकारी होगा. ताइवान दुनिया का सबसे बड़ा कंप्यूटर चिप निर्माता है और वैश्विक व्यापार का पाँचवां हिस्सा ताइवान जलडमरूमध्य से होकर गुजरता है.
युद्ध की स्थिति में आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने से न केवल अमेरिका और चीन, बल्कि पूरी दुनिया को अभूतपूर्व आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है. हालांकि चीन ताइवान को अपना प्रांत मानता है और 2049 तक इसके विलय का लक्ष्य रखता है, लेकिन फिलहाल 2030 के दशक को सैन्य क्षमता के आधार पर अधिक संवेदनशील समय माना जा रहा है.