अफ़गानिस्तान में US सैन्य अड्डा: विरोध में भारत-रूस-चीन एक साथ
नई दिल्ली । डेस्क: भारत, रूस और चीन सहित नौ देशों ने अफ़गानिस्तान में विदेशी सैन्य बुनियादी ढाँचे की तैनाती के प्रयासों का कड़ा विरोध किया है. यह विरोध अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा तालिबान शासन से रणनीतिक बरगाम एयरबेस को अमेरिका को सौंपने की माँग की पृष्ठभूमि में आया है.
"मॉस्को प्रारूप" वार्ता के एक नए संस्करण में, देशों के इस समूह ने अफ़गानिस्तान में समृद्धि और विकास लाने पर व्यापक विचार-विमर्श किया.
इन देशों ने बयान में कहा कि "विभिन्न देशों द्वारा अपनी सैन्य अवसंरचना को अफ़गानिस्तान और पड़ोसी राज्यों में तैनात करने के प्रयास अस्वीकार्य हैं, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के हितों की सेवा नहीं करता है."
इस मॉस्को प्रारूप वार्ता में तालिबान के विदेश मंत्री अमीर खान मुत्ताकी ने पहली बार भाग लिया. कुछ सप्ताह पहले, ट्रंप ने कहा था कि तालिबान को बरगाम एयरबेस अमेरिका को सौंप देना चाहिए क्योंकि इसे वाशिंगटन ने ही स्थापित किया था.
मॉस्को में हुई इस बैठक में, भाग लेने वाले राष्ट्रों ने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय दोनों स्तरों पर आतंकवाद-रोधी सहयोग को मजबूत करने का भी आह्वान किया.
बयान में कहा गया है कि, "उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अफ़गानिस्तान को आतंकवाद के उन्मूलन और थोड़े समय के भीतर इसे जड़ से खत्म करने के उद्देश्य से व्यापक उपाय करने के लिए समर्थन दिया जाना चाहिए ताकि अफ़ग़ान धरती का उपयोग पड़ोसी देशों और उससे आगे की सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में न हो."
देशों ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आतंकवाद अफ़गानिस्तान, क्षेत्र और व्यापक दुनिया की सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा है.
इस बैठक में भारत, रूस और चीन के अलावा ईरान, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, पाकिस्तान, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान ने भाग लिया.
इन देशों ने अफ़गानिस्तान के क्षेत्रीय और उससे परे के देशों के साथ आर्थिक संबंधों की आवश्यकता को रेखांकित किया. उन्होंने "क्षेत्रीय कनेक्टिविटी की प्रणाली में अफ़गानिस्तान के सक्रिय एकीकरण का समर्थन किया," बयान में कहा गया है.
मॉस्को में भारतीय दूतावास ने बताया कि राजदूत विनय कुमार के नेतृत्व में भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने एक स्वतंत्र, शांतिपूर्ण और स्थिर अफ़गानिस्तान और अफ़ग़ान लोगों के सामाजिक-आर्थिक विकास और समृद्धि का समर्थन किया. दूतावास ने सोशल मीडिया पर कहा कि कुमार ने भारत के इस रुख को दोहराया कि एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और स्थिर अफ़गानिस्तान अफ़ग़ान लोगों के हितों को पूरा करेगा और क्षेत्रीय लचीलेपन और वैश्विक सुरक्षा के लिए मौलिक होगा.
बैठक में अपने संबोधन में, रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा कि क्षेत्र और दुनिया भर में स्थिति "जटिल" है.
उन्होंने कहा, "हम देख सकते हैं कि आपकी सरकार अफ़गानिस्तान के इस्लामी अमीरात में स्थिरता की दिशा में काम कर रही है. यह आम तौर पर सहमति है कि आतंकवादी खतरे के खिलाफ संघर्ष में प्रमुख सकारात्मक बदलाव आए हैं."