ईरान के परमाणु केंद्र पर हमला, पिछले साल खत्म करने का ट्रंप का था दावा
नई दिल्ली | डेस्क: ईरान में परमाणु सुरक्षा को लेकर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है. देश की परमाणु एजेंसी Atomic Energy Organization of Iran ने दावा किया है कि आज सुबह ईरान के मध्य भाग में स्थित नतांज़ परमाणु केंद्र पर दोबारा हमला किया गया.
पिछले साल जून में अमरीका द्वारा ईरान के तीन प्रमुख परमाणु स्थलों-नतांज़, फ़ोर्दो और इस्फ़हान पर हवाई हमले किए गए थे. उस समय तत्कालीन राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि इन हमलों से ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. अब ताज़ा हमले से इस दावे पर सवाल खड़े करता है.
एजेंसी के अनुसार, शुरुआती जांच में यह साफ़ हुआ है कि इस हमले के बावजूद किसी भी प्रकार का रेडियोधर्मी पदार्थ का रिसाव नहीं हुआ है. बयान में यह भी कहा गया कि आसपास के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए फिलहाल कोई स्वास्थ्य खतरा नहीं है और स्थिति नियंत्रण में है.
ईरान की परमाणु एजेंसी ने इस घटना की तीखी निंदा की है. उसने कहा कि इस तरह का हमला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन है, खासकर Nuclear Non-Proliferation Treaty (एनपीटी), जिसका उद्देश्य परमाणु हथियारों के प्रसार को रोकना और परमाणु सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
अंतरराष्ट्रीय एजेंसी की प्रतिक्रिया
संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था International Atomic Energy Agency (IAEA) ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है. एजेंसी ने सोशल मीडिया पर जानकारी देते हुए कहा कि उसे ईरान की ओर से हमले की सूचना मिली है और शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार बाहरी क्षेत्रों में रेडिएशन स्तर सामान्य है.
IAEA ने यह भी स्पष्ट किया कि वह पूरे मामले की जांच कर रही है. साथ ही एजेंसी के महानिदेशक ने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है ताकि किसी बड़े परमाणु हादसे की संभावना से बचा जा सके.
यह पहली बार नहीं है जब नतांज़ केंद्र को निशाना बनाया गया हो. इससे पहले 3 मार्च को भी ईरान ने बताया था कि दो दिन पहले हुए एक अन्य हमले में इस केंद्र को नुकसान पहुंचा, लेकिन तब भी रेडियोधर्मी रिसाव नहीं हुआ था.
संकट गहराएगा?
नतांज़ ईरान के सबसे अहम यूरेनियम संवर्धन केंद्रों में से एक माना जाता है. इसी वजह से यह अंतरराष्ट्रीय विवादों और सुरक्षा चिंताओं के केंद्र में रहता है.
लगातार हो रहे हमले और बढ़ती बयानबाज़ी यह संकेत देती है कि क्षेत्र में तनाव अभी कम होने वाला नहीं है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इस तरह की घटनाएं जारी रहती हैं, तो इससे न केवल क्षेत्रीय स्थिरता प्रभावित होगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर परमाणु सुरक्षा को लेकर भी गंभीर चिंताएं बढ़ सकती हैं.