माओवादियों की सेंट्रल कमेटी के दो सदस्य मारे गए
जगदलपुर | संवाददाता: छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा पर अबूझमाड़ में हुई मुठभेड़ में मारे गये दो नक्सलियों की पहचान सेंट्रल कमेटी के सदस्य गुडसा उसेंडी ऊर्फ विकल्प और कोसा दादा ऊर्फ गोपन्ना के रुप में हुई है.
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन के अनुसार छत्तीसगढ़–महाराष्ट्र अंतर्राज्यीय सीमा क्षेत्र स्थित अबूझमाड़ इलाके में माओवादी गतिविधियों की सूचना पर सुरक्षा बलों ने सर्च ऑपरेशन चलाया था. इस दौरान सोमवार की सुबह से माओवादी एवं सुरक्षा बलों के बीच रुक-रुक कर फायरिंग हो रही थी.
पुलिस के अनुसार मुठभेड़ के उपरांत, मौके से दो पुरुष माओवादी कैडरों के शवों के साथ हथियार, विस्फोटक एवं अन्य सामग्री बरामद की गई. प्रारंभिक पहचान में पुष्टि हुई कि ये दोनों माओवादी कैडर केंद्रीय समिति के सदस्य राजू दादा ऊर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी और कोसा दादा ऊर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी हैं।
राजू दादा ऊर्फ कट्टा रामचंद्र रेड्डी ऊर्फ गुड़सा उसेंडी ऊर्फ विजय ऊर्फ विकल्प, आयु 63 वर्ष और कोसा दादा ऊर्फ कादरी सत्यनारायण रेड्डी ऊर्फ गोपन्ना ऊर्फ बुचन्ना आयु 67 वर्ष पर 40-40 लाख रुपये का इनाम था. दोनों ही सीपीआई माओवादी की केंद्रीय समिति के सदस्य थे.
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा है कि यह छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक उपलब्धि है.
उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल नक्सलवाद के खात्मे की दिशा में एक निर्णायक पड़ाव ही नहीं है, बल्कि छत्तीसगढ़ में शांति, सुरक्षा और विकास की प्रक्रिया को और भी गति प्रदान करती है. मुख्यमंत्री ने इस अभियान में शामिल सुरक्षाकर्मियों को बधाई देते हुए कहा कि उनकी बहादुरी और समर्पण से ही प्रदेश आज शांति और विकास की राह पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है.
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विज़न और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के नेतृत्व में नक्सलवाद का अंत अब पहले से कहीं अधिक निकट और निश्चित होता दिखाई दे रहा है. उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि मार्च 2026 तक नक्सलमुक्त भारत का संकल्प अवश्य साकार होगा.
बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुन्दरराज पी. ने कहा कि प्रतिबंधित माओवादी संगठन के खिलाफ चलाए जा रहे निर्णायक अभियानों से संगठन को बड़ी चोट पहुंची है. कठिन परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बावजूद बस्तर में तैनात पुलिस और सुरक्षा बल भारत सरकार तथा छत्तीसगढ़ सरकार की आकांक्षाओं के अनुरूप पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा कर रहे हैं.
पुलिस महानिरीक्षक ने एक बार फिर माओवादी कैडरों और उनके नेतृत्व से अपील की कि वे यह स्वीकार करें कि माओवादी आंदोलन अब अपने अंत की ओर है. यह समय है कि वे हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटें और सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरक्षा और लाभ प्राप्त करें.