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तुलसी गबार्ड की चेतावनी: पाकिस्तान की मिसाइलें US के लिए सीधा खतरा

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20 मार्च 2026, 03:44 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

तुलसी गबार्ड
तुलसी गबार्ड

वाशिंगटन । डेस्क: अमेरिका की नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड ने एक बेहद चौंकाने वाली रिपोर्ट पेश करते हुए पाकिस्तान को उन देशों की सूची में शामिल किया है, जिनकी मिसाइल क्षमताएं भविष्य में अमेरिकी मुख्य भूमि यानी होमलैंड के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं. सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के सामने साल 2026 का वार्षिक खतरा मूल्यांकन पेश करते हुए गबार्ड ने कहा कि पाकिस्तान अब रूस, चीन, उत्तर कोरिया और ईरान की कतार में खड़ा है. 


उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान ऐसे उन्नत मिसाइल सिस्टम विकसित कर रहा है, जो परमाणु और पारंपरिक दोनों तरह के हथियार ले जाने में सक्षम हैं और उनकी पहुंच सीधे अमेरिका तक हो सकती है. गबार्ड के इस बयान ने दक्षिण एशिया से लेकर वाशिंगटन तक कूटनीतिक हलचल तेज कर दी है, क्योंकि पहली बार पाकिस्तान को अमेरिकी सुरक्षा के लिए इतने बड़े और सीधे खतरे के रूप में पेश किया गया है.

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अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में पाकिस्तान को लेकर जो सबसे गंभीर बात कही गई है, वह उसकी अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) विकसित करने की क्षमता से जुड़ी है. गबार्ड ने सांसदों को बताया कि पाकिस्तान के लंबी दूरी के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम में अब ऐसे आईसीबीएम शामिल हो सकते हैं जो अमेरिका के भीतर हमला करने की ताकत रखते हों. रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान लगातार अपनी मिसाइल तकनीक को परिष्कृत कर रहा है ताकि वह दक्षिण एशिया के दायरे से बाहर के लक्ष्यों को भी निशाना बना सके. 


इसके अलावा, सामूहिक विनाश के हथियारों (WMD) की श्रेणी में भी पाकिस्तान को रूस और चीन के साथ रखा गया है. अमेरिकी आकलन का मानना है कि पाकिस्तान अपनी मिसाइलों की सटीकता और रेंज बढ़ाने पर काम कर रहा है ताकि वह अमेरिकी मिसाइल रक्षा प्रणालियों को चुनौती दे सके. इस रिपोर्ट में भारत-पाकिस्तान संबंधों को भी परमाणु संघर्ष के जोखिम के तौर पर रेखांकित किया गया है, जिसमें पिछले साल के पहलगाम हमले जैसे उदाहरणों का जिक्र किया गया है.


हालांकि, पाकिस्तान ने तुलसी गबार्ड और अमेरिकी खुफिया विभाग के इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है. पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि पाकिस्तान की रणनीतिक क्षमताएं पूरी तरह से रक्षात्मक हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि पाकिस्तान का मिसाइल कार्यक्रम 'क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस' के सिद्धांत पर आधारित है और इसका एकमात्र उद्देश्य भारत के खिलाफ अपनी संप्रभुता की रक्षा करना है. 


पाकिस्तान ने यह तर्क भी दिया कि उसकी सबसे लंबी दूरी की मिसाइल 'शाहीन-III' की मारक क्षमता केवल 2,750 किलोमीटर है, जो पूरे भारत को तो कवर करती है लेकिन अमेरिका के 11,200 किलोमीटर के फासले को पाटने के लिए नाकाफी है. 


पाकिस्तानी अधिकारियों ने अमेरिका पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया और कहा कि भारत 12,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइलें बना रहा है, लेकिन अमेरिका उस पर चुप्पी साधे हुए है.


विशेषज्ञों के बीच भी इस रिपोर्ट को लेकर मतभेद हैं. कुछ विश्लेषकों का मानना है कि गबार्ड का यह बयान जमीनी हकीकत से ज्यादा भविष्य की आशंकाओं पर आधारित है. पाकिस्तान के पास फिलहाल ऐसी कोई मिसाइल नहीं है जिसे आईसीबीएम की श्रेणी में रखा जा सके. 


दूसरी ओर, जून 2025 में कुछ अमेरिकी अधिकारियों ने यह दावा किया था कि पाकिस्तान अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें इसलिए विकसित कर रहा है ताकि भविष्य में किसी भी भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान वह अमेरिका को हस्तक्षेप करने से रोक सके. 


तुलसी गबार्ड की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के बीच संबंधों में सुधार देखा जा रहा था. इस नई खुफिया रिपोर्ट ने पाकिस्तान के साथ अमेरिका के कूटनीतिक 'रीसेट' पर फिर से सवालिया निशान लगा दिए हैं और यह स्पष्ट कर दिया है कि बेहतर द्विपक्षीय संबंधों के बावजूद अमेरिका पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य ताकत को एक गंभीर सुरक्षा चुनौती के रूप में देख रह खतरा

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP