ट्रंप के टैरिफ से अमेरिकी जनता को ही नुकसान हुआ
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एक साल पहले 'लिबरेशन डे' कार्यकारी आदेश के तहत लागू किए गए 10 प्रतिशत वैश्विक टैरिफ का सबसे बड़ा खामियाजा वहां की आम जनता को भुगतना पड़ा है. हालांकि राष्ट्रपति ने वादा किया था कि इन शुल्कों से देश अमीर बनेगा और व्यापार घाटा कम होगा, लेकिन नवीनतम आर्थिक आंकड़े एक अलग ही कहानी बयां कर रहे हैं.
न्यूयॉर्क फेडरल रिजर्व के अर्थशास्त्रियों के शोध से यह कड़वा सच सामने आया है कि इन टैरिफ का लगभग 90 प्रतिशत आर्थिक बोझ विदेशी निर्यातकों के बजाय सीधे तौर पर अमेरिकी व्यवसायों और उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ा है.
टैक्स फाउंडेशन की रिपोर्ट के अनुसार, इस व्यापार नीति के कारण औसत अमेरिकी परिवार की आर्थिक स्थिति काफी खराब हुई है. वर्ष 2025 में एक औसत अमेरिकी परिवार को अपनी बुनियादी जरूरतों जैसे किराने का सामान, कपड़े और कारों के लिए पहले की तुलना में 1,000 डॉलर से अधिक का अतिरिक्त भुगतान करना पड़ा.
इस नीति ने प्रभावी अमेरिकी टैरिफ दर को 2.6 प्रतिशत से बढ़ाकर 13 प्रतिशत से अधिक कर दिया, जो द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का उच्चतम स्तर है. आंकड़ों से स्पष्ट है कि यह टैरिफ चीन या यूरोपीय संघ जैसे देशों के लिए कर नहीं, बल्कि अमेरिकी नागरिकों पर एक अदृश्य कर की तरह साबित हुआ, जिसने उनकी क्रय शक्ति को बुरी तरह प्रभावित किया.
हाल ही में 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के इन व्यापक टैरिफ को अवैध करार देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के पास राष्ट्रीय आपातकाल का बहाना बनाकर इस तरह के अनिश्चितकालीन आर्थिक प्रतिबंध लगाने का अधिकार नहीं है.
अदालती फैसले के बाद यह अनुमान लगाया गया है कि सरकार को उन अमेरिकी व्यवसायों को 175 बिलियन डॉलर वापस करने पड़ सकते हैं, जिन्होंने भारी मन से यह शुल्क चुकाया था.
न्यूयॉर्क फेड के सर्वेक्षण बताते हैं कि टैरिफ के दायरे में आने वाले आधे से अधिक व्यवसायों ने अपनी लागत निकालने के लिए उत्पादों की कीमतें बढ़ा दी थीं, जिससे सीधे तौर पर महंगाई बढ़ी.
इस नीति का सबसे क्रूर प्रभाव निम्न-आय वाले परिवारों पर पड़ा है, जो अपनी कमाई का एक बड़ा हिस्सा भोजन और कपड़ों जैसी अनिवार्य वस्तुओं पर खर्च करते हैं. जनता के बढ़ते आक्रोश और आर्थिक दबाव को देखते हुए ही प्रशासन को नवंबर में कॉफी, गोमांस और संतरे जैसी 237 खाद्य श्रेणियों को टैरिफ से मुक्त करने पर मजबूर होना पड़ा.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन ने एक अन्य कानून का सहारा लेकर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लागू कर दिया है, जिससे परिवारों पर सालाना बोझ घटकर 600 डॉलर रहने की उम्मीद है. इसके बावजूद, यह स्पष्ट है कि ट्रंप की संरक्षणवादी नीतियों ने अमेरिकी मध्यम वर्ग और गरीबों की वित्तीय कमर तोड़ने का ही काम किया है.