ट्रम्प के 'मृत अर्थव्यवस्था' तंज पर भारत का पलटवार
नई दिल्ली । डेस्क: आम आदमी पार्टी के सांसद अशोक कुमार मित्तल ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की शुल्क नीति की कड़ी आलोचना की है. ट्रम्प को लिखे एक खुले पत्र में उन्होंने कहा, "आपने भारत को 'मृत अर्थव्यवस्था' कहा, लेकिन यह 'मृत अर्थव्यवस्था' दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और जल्द ही तीसरी बनने वाली है. अमेरिकी कंपनियां शिक्षा, प्रौद्योगिकी, वित्त और बौद्धिक संपदा के क्षेत्र में प्रतिवर्ष 80 बिलियन डॉलर से अधिक कमा रही हैं."
ट्रम्प ने भारत पर तीखा हमला बोलते हुए उसे 'टैरिफ किंग' और उसकी अर्थव्यवस्था को 'मृत' करार दिया था. रूस से तेल खरीदने के कारण उन्होंने भारतीय आयात पर 50% शुल्क लगा दिया है.
गौरतलब है कि मैकडॉनल्ड्स, कोका-कोला, अमेजन और ऐप्पल जैसी बड़ी अमेरिकी कंपनियां भारत में अपने कारोबार का विस्तार कर रही हैं. भारत वर्तमान में अमेरिका का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है. यदि भारत जवाबी कार्रवाई करता है, तो अमेरिका को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.
ट्रम्प भले ही भारत को 'मृत अर्थव्यवस्था' कह रहे हों, लेकिन कई अमेरिकी कंपनियां भारत में शानदार मुनाफा कमा रही हैं. प्रौद्योगिकी, ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और वित्त जैसे क्षेत्रों में अमेरिकी कंपनियों की मजबूत उपस्थिति है. भारत की शीर्ष 20 आईटी कंपनियों में से अधिकांश अमेरिकी हैं, जो भारी निवेश और मुनाफा कमा रही हैं.
वर्ष 2024-25 में भारत और अमेरिका के बीच 131.84 बिलियन डॉलर का व्यापार हुआ. इस दौरान भारत ने अमेरिका को 86.51 बिलियन डॉलर का निर्यात किया, जबकि अमेरिका ने भारत को 45.33 बिलियन डॉलर का सामान भेजा.
दोनों देश एक-दूसरे पर निर्भर हैं, जहां भारत अमेरिका से पेट्रोलियम उत्पाद, विमान के पुर्जे और कोयला खरीदता है, वहीं अमेरिका भारत से दवाएं, प्रौद्योगिकी, रत्न और आभूषण आयात करता है.
30 जुलाई को ट्रम्प ने भारतीय सामानों पर 25% शुल्क लगाने की घोषणा की थी और चेतावनी दी थी कि रूस से तेल या हथियार खरीदने वाले देशों पर और सख्त व्यापारिक प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं.
उन्होंने कहा, "मुझे इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि भारत रूस के साथ क्या करता है. दोनों मृत अर्थव्यवस्थाएं हैं. मैं केवल अमेरिका के हित में शुल्क लगा रहा हूं."
उन्होंने यह भी कहा कि अगर रूस शांति समझौते पर सहमत नहीं होता, तो तेल खरीदने वाले देशों पर 100% तक आयात शुल्क लगाया जा सकता है.