BRICS देशों पर 10 फीसदी टैरिफ- ट्रंप
नई दिल्ली । डेस्क: डोनाल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स देशों पर 10 फीसदी टैरिफ थोप दिया है. इसकी घोषणा उन्होंने अपनी कैबिनेट की बैठक के बाद की है. इस बात के कयास पहले से लगाये जा रहे थे कि ट्रंप ब्रिक्स देशों द्वारा नई मुद्रा शुरू करने को लेकर आशंकित हैं.
अमरीका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आजकल हर देश पर, हर बात पर टैरिफ लगाने की धमकी दे रहें हैं. दरअसल, ट्रंप का टैरिफ गेम अमरीकी अर्थव्यवस्था के संकट को दूसरे देशों पर थोपने की एक कोशिश मात्र है.
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, "ब्रिक्स की स्थापना ही हमारे डॉलर को नुकसान पहुंचाने के लिए की गई थी."
ट्रंप ने कहा, "अगर वो ये खेल खेलना चाहते हैं तो ठीक है, लेकिन मैं भी यह खेल खेल सकता हूं."
इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल अकाउंट पर 7 जुलाई को पोस्ट किया कि 'जो भी देश ख़ुद को ब्रिक्स की अमरीका विरोधी नीतियों के साथ जोड़ता है, उस पर अतिरिक्त 10 फ़ीसदी टैरिफ़ लगाया जायेगा. इस नीति में कोई छूट नहीं दी जायेगी. इस मामले पर ध्यान देने के लिये आपका धन्यवाद.'
ब्रिक्स देशों पर 10 फीसदी टैरिफ का अर्थ है कि इन देशों से अणरीका में निर्यात किये जाने वाले उत्पाद पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैक्स देना होगा. इस तरह से उनके उत्पाद अमरीका में 10 फीसदी महंगे हो जायेंगे तथा बाजार में उके दाम बढ़ जायेंगे. जिससे उन्हें अमरीकी उत्पादों से प्रतियोगिता करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ेगा.
ब्रिक्स क्या है
ब्रिक्स (BRICS) उभरती राष्ट्रीय अर्थव्यवस्थाओं के एक संघ है. इसके घटक राष्ट्र ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका हैं. इन्हीं देशों के अंग्रेज़ी में नाम के प्रथमाक्षरों B, R, I, C व S से मिलकर इस समूह का यह नामकरण हुआ है. इसकी स्थापना 2009 में हुई,और इसके ५ सदस्य देश है.
मूलतः, 2010 में दक्षिण अफ्रीका के शामिल किये जाने से पहले इसे "ब्रिक" के नाम से जाना जाता था. रूस को छोडकर, ब्रिक्स के सभी सदस्य विकासशील या नव औद्योगीकृत देश हैं जिनकी अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़ रही है. ये राष्ट्र क्षेत्रीय और वैश्विक मामलों पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं.
एक अनुमान के अनुसार ये राष्ट्र संयुक्त विदेशी मुद्रा भंडार में ४ खरब अमरीकी डॉलर का योगदान करते हैं. इन राष्ट्रों का संयुक्त सकल घरेलू उत्पाद १५ खरब अमरीकी डॉलर का है. ब्रिक्स देशों का वैश्विक जीडीपी में 23 फीसदी का योगदान करता है तथा विश्व व्यापार के लगभग 18 फीसदी हिस्सा है. इसे R-5 के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इन पांचों देशों की मुद्रा का नाम 'R' से शुरू होता है.