ईरान ट्रेड पर ट्रंप का 25% टैरिफ, भारत पर असर मामूली
नई दिल्ली । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर दबाव बढ़ाने के उद्देश्य से एक बड़ा फैसला लेते हुए उन सभी देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है जो ईरान के साथ व्यापार कर रहे हैं. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर स्पष्ट किया कि यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा और ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों को अब अमेरिका के साथ किए जाने वाले अपने कारोबार पर 25% शुल्क चुकाना होगा.
हालांकि, विशेषज्ञों और आधिकारिक सूत्रों का मानना है कि इस कदम का भारत के समग्र व्यापार पर बहुत सीमित प्रभाव पड़ेगा. भारत का ईरान के साथ व्यापार पहले से ही काफी कम है और पिछले वित्त वर्ष में यह मात्र 1.7 बिलियन डॉलर था, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का केवल 0.15% है.
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशन (FIEO) के महानिदेशक अजय सहाय के अनुसार, भारत को इस कदम से बहुत अधिक चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि भारतीय उद्योग और बैंक पहले से ही अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन कर रहे हैं.
भारत मुख्य रूप से ईरान को मानवीय आधार पर चावल, चाय, दवाइयां और फल जैसी आवश्यक वस्तुओं का निर्यात करता है, जिन पर आमतौर पर इस तरह के प्रतिबंध लागू नहीं होते.
हालांकि, ईरान की मुद्रा में आई भारी गिरावट और वहां जारी आंतरिक अशांति भारतीय निर्यातकों के लिए भुगतान संबंधी चुनौतियां पैदा कर सकती है.
वर्तमान में भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार सौदे पर बातचीत चल रही है, जबकि भारत पहले से ही अमेरिका द्वारा लगाए गए कुछ उच्च शुल्कों का सामना कर रहा है.
नई दिल्ली की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका इन नए प्रतिबंधों के विवरण कैसे साझा करता है और चाबहार बंदरगाह जैसे रणनीतिक हितों पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है.
गौरतलब है कि चाबहार बंदरगाह भारत और ईरान के बीच रणनीतिक संबंध व्यापार से कहीं आगे 'कनेक्टिविटी' और सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं. जिसमें चाबहार बंदरगाह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह के मुकाबले भारत के लिए मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक पहुंचने का एक वैकल्पिक प्रवेश द्वार है.
मई 2024 में भारत ने इसके शाहिद बेहेश्टी टर्मिनल के संचालन हेतु 10 साल के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए और बुनियादी ढांचे के लिए करोड़ों डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है. हालांकि ट्रंप के नए टैरिफ और प्रतिबंधों के बाद इसके लिए मिलने वाली अमेरिकी छूट के भविष्य पर अनिश्चितता पैदा हो गई है.
इसके अतिरिक्त, ईरान 'इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर' (INSTC) का केंद्र है जो भारत को रूस और यूरोप से जोड़ने के लिए महत्वपूर्ण है, साथ ही यह क्षेत्र में पाकिस्तान और चीन के बढ़ते प्रभाव के खिलाफ एक कूटनीतिक संतुलन भी प्रदान करता है.
यद्यपि 2019 के प्रतिबंधों के बाद भारत ने ईरान से तेल आयात बंद कर दिया था, लेकिन वर्तमान में भारत 'रुको और देखो' की नीति अपनाते हुए अपने व्यापारिक हितों की रक्षा और किसी भी सैन्य संघर्ष की स्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए निकासी योजना तैयार कर रहा है.