विश्वभर में 'एमपॉक्स' के नये वेरियेंट 'क्लेड 1' का खतरा: WHO ने दी चेतावनी
नई दिल्ली । डेस्क: कोरोना वायरस के बाद भी दुनिया चैन से नहीं बैठ पाई है. एक के बाद एक वायरस का आगमन हो रहा है, और अब 'एमपॉक्स' नामक एक और दहशत वापस आ गई है, जिसे विश्वभर में 'मंकीपॉक्स' के नाम से जाना जाता है.
पहले यह वायरस पूर्वी अफ्रीकी देशों में फैला था. लेकिन हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी की है कि मंकीपॉक्स का एक नया उप-स्वरूप, 'क्लेड 1', अमेरिका समेत कई देशों में फैल रहा है. दक्षिण कैलिफ़ोर्निया में पहले ही कई लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं, और अन्य कई देशों में भी एमपॉक्स के फैलने की खबरें हैं.
WHO ने 2022 में मंकीपॉक्स को लेकर चेतावनी दी थी, और अब एक बार फिर अलर्ट जारी किया गया है. यह रोग पहले मुख्य रूप से पूर्वी, पश्चिमी और मध्य अफ्रीका तक ही सीमित था, लेकिन अब यह दुनिया के अन्य हिस्सों में भी फैल गया है.
एमपॉक्स: लक्षण और फैलाव
एमपॉक्स एक पशुजन्य (zoonotic) वायरस है, जो जानवरों के शरीर से इंसानों में संक्रमित होता है. इसके लक्षण काफी हद तक चिकनपॉक्स जैसे होते हैं: पूरे शरीर पर छोटे-बड़े चकत्ते, फुंसियां और पानी भरे छाले पड़ना. हालांकि, मंकीपॉक्स के मामले में एक अतिरिक्त लक्षण देखा जाता है, जिसमें शरीर की ग्रंथियां (lymph nodes) सूज जाती हैं, जिससे रक्त संचार में बाधा उत्पन्न होती है. रोगी को पूरे शरीर की मांसपेशियों में दर्द, और अवसाद भी हो सकता है.
एमपॉक्स, कोरोना की तरह ही संक्रामक (contagious) है. संक्रमित व्यक्ति की खांसी, छींक, थूक, लार या शरीर के तरल पदार्थों से यह संक्रमण तेज़ी से फैल सकता है. श्वसन नली, घाव, नाक, मुंह या आंखों के ज़रिए भी यह वायरस स्वस्थ व्यक्ति के शरीर में प्रवेश कर सकता है. संक्रमित व्यक्ति के कपड़े और अन्य इस्तेमाल की गई चीज़ों से भी संक्रमण फैल सकता है.रोकथाम और चिं
अभी तक मंकीपॉक्स को पूरी तरह से रोकने के लिए कोई विशेष दवा या टीका उपलब्ध नहीं है. वायरस-रोधी उपचार द्वारा रोगी को ठीक करने का प्रयास किया जाता है. कुछ मामलों में, चेचक के लिए प्रभावी टीका भी संक्रमण को रोकने में मदद कर सकता है.
पिछले साल भारत के कई हिस्सों में, ख़ासकर केरल में, मंकीपॉक्स के मरीज़ पाए गए थे. इस वायरस के फिर से सक्रिय होने से स्वास्थ्य अधिकारियों की चिंता बढ़ गई है.ता