माओवादी बारसा देवा के भाई ने कहा-बंदूक की लोकतंत्र में कोई जरूरत नहीं
छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के पुवर्ती गांव में देवा के भाई से बातचीत
सुकमा | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले का गांव पुवर्ती इन दिनों सुर्खियों में है. पुवर्ती वह गांव है, जहां माओवादियों की बटालियन नंबर-1 का संस्थापक हिड़मा और माओवादी कमांडर बारसा देवा का जन्म हुआ है.
यहां इन दोनों ने माओवादी संगठन को मजबूत किया और लाल लड़ाकों को तैयार किया. बेहद छोटी उम्र में नक्सल संगठन से दोनों जुड़ गए.
इसके बाद माओवाद की दुनिया में ये दोनों जाना-पहचाना नाम हो गए. मौजूदा वक्त में फोर्स के बढ़ते दबाव और लगातार हो रही है मुठभेड़ों में मारे जा रहे माओवादी नेताओं को लेकर माओवादी संगठन चिंतित हैं.
माओवादी नेता और संगठन के प्रवक्ता शांति वार्ता की पहल कर रहे हैं. माओवादियों की ओर से यह पहल एक बार नहीं कई बार हो चुकी है.
बावजूद इसके सरकार का रुख साफ है. बिना शर्त शांति वार्ता और सरकार की समर्पण नीति पर ही माओवादी नेताओं को भरोसा करना होगा.
हलांकि वर्तमान में राज्य के गृहमंत्री ने किसी भी तरह की शांति वार्ता से इंकार किया है.
सुरक्षाबलों ने माओवादियों के सबसे सुरक्षित जोन कर्रेगुट्टालु की पहाड़ी को कब्जे में लेते हुए यहां पर कैंप स्थपित कर लिया है.
ये वही पहाड़ी है, जिसके लिए माओवादियों ने कहा था कि यहां किसी के आने की जरूरत नहीं है. पूरी पहाड़ी पर माईंस बिछा रखी है.
सुरक्षा बलों के बढ़ते दबाव के बीच बटालियन नंबर-1 के कमांडर बारसा देवा के भाई बारसा बुधरा ने सेंट्रल गोंडवाना खबर से खास बातचीत की है. वह बीएससी द्वितीय वर्ष के छात्र हैं.
वह देवा से बहुत छोटे हैं. भाई कब संगठन में शामिल हुआ उन्हें नहीं मालूम.
पांच भाई है देवा
करीब एक वर्ष पहले बुधरा अपने भाई देवा से मिले थे. उनका कहना है कि वह किस पद पर है ये तो नहीं पता, लेकिन वह बटालियन नंबर-1 को संभालता है.
देवा सहित वह पांच भाई हैं. पांचों भाईयों में चौथे नंबर का है देवा. देवा ने शादी की है. उसकी पत्नी और बच्चे गांव में रहते हैं.
वह पढ भी रहे हैं. देवा की बड़ी बेटी 11 वीं में है. बेटा 9 वीं कक्षा में पढ़ रहा है और उससे छोटा मां के साथ गांव में रहता है.
कभी नहीं कहा हथियार छोड़ दो
बुधरा बारसा आगे बातचीत में कहते हैं कि एक तो बड़ा भाई है और संगठन संभाल रहा था. डर की वजह से कभी समर्पण करने की बात कहने की हिम्मत नहीं जुटा पाया.
खुद पढा नहीं है, बावजूद इसके उसी ने मुझे पढ़ाया. अब कहता हूं कि लोकतंत्र में बंदूक की कोई जगह नहीं है. शांति वार्ता का प्रस्ताव अच्छा है.
सरकार को भी मान लेना चाहिए या भाई खुद समर्पण कर दे. हिड़मा और देवा दोनों ही संगठन में काम करते है. हिड़मा की मां और भाई पुवर्ती में ही रहते है.
बहुत बदल गया पुवर्ती, पहले था डर का माहौल
पुवर्ती में पहले जैसा कुछ भी नहीं रहा है. जगह-जगह पर कैंप स्थापित हो चुके हैं. पानी की उचित व्यवस्था और स्कूल का भी संचालन हो रहा है.
पहले तो डर का माहौल था. आवागमन आसानी से हो रहा है. पूरा परिवार आज भी वहीं रह रहा है.
परिवार में 9 सदस्य हैं. भाई देवा की पत्नी और बच्चों को मिलाकर. गांव में ही सभी रह रहे हैं.
देवा के भाई का कहना है कि सोशल मीडिया में देखता-सुनता रहता हूं, अब कह रहा हूं भाई समर्पण कर दो.