रवि, 18 अक्टू. 2026

CGKhabar

'एपिक फ्यूरी' से 'फेक विक्ट्री' के बीच गहराया तनाव

C

CG Khabar

30 मई 2026, 06:38 PM 3 मिनट में पढ़ें 2

डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप

तेहरान । डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर दावा किया है कि वाशिंगटन और ईरान एक समझौते के बेहद करीब हैं. हालांकि, ईरानी सूत्रों ने उनके इन दावों को पूरी तरह खारिज करते हुए इसे "सत्य और अतिशयोक्ति का मिश्रण" बताया है. ईरान का कहना है कि अमेरिका केवल अपनी एक कृत्रिम जीत दिखाने की कोशिश कर रहा है.


ट्रंप के दावे: परमाणु मुद्दा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर शर्तें


ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर कई बयान जारी कर कहा कि ईरान को इस बात पर सहमत होना ही होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा. इसके साथ ही उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्यको बिना किसी ट्रांजिट फीस के तुरंत दोनों तरफ से खोलने की मांग की.

विज्ञापन


ट्रंप ने यह भी दावा किया कि ईरान के आसपास लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंध हटा दिए जाएंगे और फंसे हुए जहाज वापस लौट सकेंगे. उन्होंने कहा कि क्षेत्र में बिछाई गई समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम ईरान और अमेरिकी सेना मिलकर करेंगे. इसके अतिरिक्त, तथाकथित "दबे हुए परमाणु कचरे" को निकालने का काम अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के समन्वय से किया जाएगा, लेकिन "अगले आदेश तक ईरान के साथ कोई वित्तीय लेनदेन नहीं होगा."


ईरान का तीखा पलटवार: दावों को बताया झूठ


ईरानी मीडिया और समाचार एजेंसी 'फार्स' ने ट्रंप के दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. ईरानी अधिकारियों के अनुसार, ट्रंप का यह दावा पूरी तरह से गलत है कि ईरान अपनी परमाणु सामग्री को नष्ट कर देगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि वर्तमान में चर्चा के तहत समझौता ज्ञापन में ऐसा कोई प्रावधान शामिल नहीं है.


ईरान ने साफ कर दिया है कि जब तक प्रतिबंधों से राहत और परमाणु मुद्दों से जुड़े सभी लंबित मामलों का समाधान नहीं हो जाता, तब तक तेहरान बातचीत के अगले चरण में नहीं बढ़ेगा. कोई भी अंतिम समझौता ईरान की रेड लाइन्स और अमेरिका के प्रति उसके पुराने अविश्वास को ध्यान में रखकर ही तय किया जाएगा.


सीजफायर का उल्लंघन और सैन्य टकराव


फारस की खाड़ी में दोनों देशों के बीच सैन्य झड़पें और दक्षिण ईरान पर अमेरिकी हमलों के बाद तनाव एक नए चरण में पहुंच गया है. अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास एक ईरानी ठिकाने पर हमला किया, जो अमेरिकी सेना के लिए खतरा था. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने युद्धविराम की स्थिति को "उलझा हुआ" बताया और स्वीकार किया कि मैदानी कमांडरों और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच समन्वय की कमी के कारण "गलतियां" हो सकती हैं.


दूसरी तरफ, ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशन गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने कहा कि अमेरिकी सेना ने बंदर अब्बास हवाई अड्डे के पास हमला किया था, जिसके जवाब में ईरान ने कुवैत में स्थित उस अमेरिकी एयरबेस को निशाना बनाया जहां से हमला किया गया था. ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हमलों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) का खुला उल्लंघन बताया है.


होर्मुज जलडमरूमध्य: ईरान का 'गोल्डन कार्ड'


इस पूरे विवाद में ईरान ने अपनी नई रक्षा प्रणाली "आराश कमानगीर" (Arash Kamangir) का उपयोग करके एक दुश्मन ड्रोन को मार गिराने का दावा किया है. सामरिक स्तर पर, कई पश्चिमी विश्लेषकों ने भी माना है कि इस क्षेत्र में भौगोलिक रूप से ईरान का पलड़ा भारी है.


रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट (RUSI) और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका के पास होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह सुरक्षित करने की कोई स्पष्ट रणनीति नहीं है और ईरान के प्रभाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. 


'सेंटर फॉर स्ट्रेटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज' (CSIS) और 'अल-मॉनिटर' ने होर्मुज जलडमरूमध्य को ईरान का "गोल्डन कार्ड" बताया है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अंतरराष्ट्रीय व्यापार की सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील है.

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP