TCS नाशिक BPO केस: आरोपी निदा खान को कोर्ट से राहत नहीं मिली
नाशिक । डेस्क: टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नाशिक स्थित बीपीओ में यौन उत्पीड़न और धार्मिक जबरदस्ती के गंभीर मामले में जिला अदालत ने आरोपी निदा खान को फिलहाल कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया है.
सोमवार 20 अप्रैल को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने निदा खान की उस याचिका पर तुरंत आदेश देने से मना कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए गिरफ्तारी से सुरक्षा मांगी थी.
अब अदालत उनकी अग्रिम जमानत याचिका पर 27 अप्रैल को विचार करेगी.
इस मामले में पुलिस अब तक कई आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें मोहम्मद दानिश शेख, शफी बीखन शेख, टीम लीडर रजा रफीक मेमन, तौसीफ अत्तर, शाहरुख कुरैशी और आसिफ आफताब अंसारी शामिल हैं.
इन पर महिला सहकर्मियों के साथ अश्लील टिप्पणी करने, पीछा करने, मानसिक उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के लिए दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप लगे हैं.
पुलिस ने आंतरिक शिकायत समिति (POSH) के ऑपरेशंस मैनेजर अश्विन चैनानी को भी गिरफ्तार किया है, जिन पर शिकायतों को नजरअंदाज करने और उचित कार्रवाई न करने का आरोप है.
स्थानीय पुलिस इस पूरे नेटवर्क और कंपनी के भीतर चल रही गतिविधियों की गहनता से जांच कर रही है.
TCS नाशिक BPO केस
टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के नाशिक स्थित बीपीओ (BPO) केंद्र में सामने आया यह मामला कार्यस्थल पर यौन उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना और जबरन धार्मिक रूपांतरण के प्रयासों से जुड़ी एक बेहद गंभीर घटना है. इस मामले की गंभीरता को देखते हुए नाशिक पुलिस ने एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है, जिसमें साक्ष्य जुटाने के लिए महिला पुलिस अधिकारियों को 40 दिनों तक कंपनी में 'अंडरकवर' (पहचान छिपाकर) कर्मचारी के रूप में काम करना पड़ा. अब तक प्राप्त जानकारी के अनुसार, इस पूरे प्रकरण के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
मामले की शुरुआत: यह मामला तब उजागर हुआ जब एक हिंदू महिला कर्मचारी के परिवार ने पुलिस से संपर्क किया. उन्हें पता चला कि उनकी बेटी पर कार्यस्थल पर इस्लाम अपनाने का दबाव डाला जा रहा था और उसे रमजान के दौरान रोजा रखने के लिए मजबूर किया गया था. जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि यह कोई अकेली घटना नहीं थी, बल्कि 2022 से 2026 के बीच कई महिलाओं के साथ ऐसा व्यवहार किया गया.
आरोप और FIR: पुलिस ने अब तक इस मामले में 9 FIR दर्ज की हैं. आरोप है कि वरिष्ठ पुरुष सहकर्मी और टीम लीडर्स महिला कर्मचारियों (मुख्य रूप से 18 से 25 वर्ष की आयु वर्ग) का यौन उत्पीड़न करते थे, उन्हें अनुचित तरीके से छूते थे और उन पर अश्लील टिप्पणियाँ करते थे. इसके अलावा, उन पर हिंदू देवी-देवताओं का अपमान करने, जबरन मांसाहार खिलाने और नमाज पढ़ने के लिए दबाव डालने के भी आरोप हैं.
POSH कमेटी की विफलता: इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू 'आंतरिक शिकायत समिति' (POSH) की विफलता है. पुलिस ने अश्विन चैनानी (ऑपरेशंस मैनेजर और POSH समिति के सदस्य) को इसलिए गिरफ्तार किया क्योंकि उन्होंने दर्जनों ईमेल और लिखित शिकायतों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं की. आरोप है कि शिकायत करने वाली महिलाओं को ही डराया-धमकाया गया या उनका काम बढ़ा दिया गया.
आरोपियों की भूमिका: मुख्य आरोपी मोहम्मद दानिश शेख पर शादी का झांसा देकर बलात्कार करने और धर्म परिवर्तन के लिए उकसाने का मामला दर्ज है. निदा खान नामक महिला कर्मचारी पर आरोप है कि वह पीड़ित महिलाओं और पुरुष आरोपियों के बीच एक कड़ी का काम करती थी और उन्हें 'जाल' में फँसाने में मदद करती थी.
राष्ट्रीय महिला आयोग की जांच: मामले के तूल पकड़ने के बाद राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने एक तथ्य-अन्वेषण समिति (Fact-finding committee) का गठन किया है. इस समिति ने नाशिक कार्यालय का दौरा कर पीड़ितों, पुलिस और कंपनी प्रबंधन के बयान दर्ज किए हैं ताकि कार्यस्थल पर सुरक्षा नियमों के उल्लंघन की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा सके.