टाटा संस: चंद्रा के कार्यकाल विस्तार को नोएल टाटा ने बताया 'गैरकानूनी'
नई दिल्ली । डेस्क: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस के बोर्ड रूम में नेतृत्व को लेकर एक बार फिर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. टाटा ट्रस्ट्स के अध्यक्ष नोएल एन. टाटा ने एन. चंद्रशेखरन (चंद्रा) को अगले पांच वर्षों के लिए फिर से कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त करने के टाटा संस के बोर्ड के फैसले को "गैरकानूनी" करार दिया है.
हाल ही में हुई टाटा संस के बोर्ड की बैठक में चंद्रशेखरन को पांच साल का विस्तार देने का प्रस्ताव बहुमत से पारित किया गया. इससे पहले 63 वर्षीय चंद्रशेखरन ने अपना मौजूदा कार्यकाल (जो 20 फरवरी 2027 को समाप्त हो रहा है) खत्म होने के बाद पद छोड़ने की इच्छा जताई थी. हालांकि, नामांकन और पारिश्रमिक समिति (NRC) की सिफारिश के बाद बोर्ड ने उनसे अपने फैसले पर पुनर्विचार करने का अनुरोध किया.
बैठक में नोएल टाटा ने इस फैसले के खिलाफ मतदान किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया. नोएल टाटा के अनुसार, टाटा संस के 'आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन' के तहत कुछ महत्वपूर्ण निर्णयों के लिए टाटा ट्रस्ट्स द्वारा नियुक्त अधिकांश निदेशकों की सहमति अनिवार्य है. उन्होंने आरोप लगाया कि उनके वीटो को गलत तरीके से खारिज किया गया, जबकि बोर्ड का मानना है कि गतिरोध की स्थिति में अध्यक्ष के पास निर्णायक वोट (कास्टिंग वोट) देने का अधिकार है.
इस फैसले के साथ ही टाटा संस में नए अध्यक्ष की तलाश प्रक्रिया भी फिलहाल थम गई है. चंद्रा के इस्तीफे के संकेत के बाद नए उत्तराधिकारी की खोज शुरू की गई थी, जिसमें कई प्रमुख नामों पर विचार हो रहा था.
IPO और लिस्टिंग की ओर बढ़े कदम
विवादों के बीच, बोर्ड ने भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों का पालन करने और टाटा संस को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्णय लिया है. आरबीआई ने टाटा संस को 'अपर लेयर' गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (NBFC) के रूप में वर्गीकृत किया है, जिसके तहत कंपनी को सूचीबद्ध होना अनिवार्य है. हाल ही में आरबीआई ने कोर इन्वेस्टमेंट कंपनी के रूप में अपना पंजीकरण रद्द करने की टाटा संस की याचिका खारिज कर दी थी.
अगर टाटा संस का आईपीओ बाजार में आता है, तो यह भारत के इतिहास के सबसे बड़े आईपीओ में से एक हो सकता है. बाजार अनुमानों के मुताबिक कंपनी का मूल्यांकन लगभग 20 लाख करोड़ रुपये तक हो सकता है. टाटा संस का यह पुनर्नियोजन और लिस्टिंग प्रस्ताव आगामी वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी के लिए रखा जाएगा, जहां इस मुद्दे पर फिर से खींचतान देखने को मिल सकती है.