ईरान-अमेरिका के बीच बातचीत ‘सकारात्मक’, लेकिन युद्ध की आशंका बरकरार
मस्कट । डेस्क: ईरान और अमेरिका के बीच ओमान में हुई अप्रत्यक्ष बातचीत को ईरानी अधिकारियों ने "सकारात्मक" करार दिया है, लेकिन मस्कट में हुई इस वार्ता से युद्ध की बढ़ती आशंकाओं को कम करने के लिए फिलहाल कोई ठोस रोडमैप सामने नहीं आया है. ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल और अमेरिका के विशेष दूत स्टीव विटकॉफ व जारेड कुशनर के बीच हुई इस चर्चा में ओमान ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई.
अराघची ने बातचीत को एक "अच्छी शुरुआत" बताया, लेकिन साथ ही चेतावनी दी कि इस साल जून में ईरानी परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमलों के बाद से दोनों देशों के बीच "अविश्वास" का माहौल गहरा है. ओमान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस वार्ता का मुख्य उद्देश्य राजनयिक और तकनीकी बातचीत को फिर से शुरू करने के लिए उचित स्थितियां बनाना था.
यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ सैन्य विकल्पों पर विचार कर रहे हैं और क्षेत्र में अमेरिकी युद्धपोतों व लड़ाकू विमानों की तैनाती बढ़ा दी गई है.
अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को पूरी तरह बंद करे, अपनी बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता को सीमित करे और क्षेत्रीय सशस्त्र समूहों को समर्थन देना बंद करे.
वहीं, ईरान का रुख स्पष्ट है कि वह केवल प्रतिबंध हटाने और तनाव कम करने के लिए परमाणु मुद्दों पर ही बात करेगा, जबकि मिसाइल कार्यक्रम उसकी 'रेड लाइन' है.
इस बीच, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने खोर्रमशहर-4 बैलिस्टिक मिसाइल का नया परीक्षण कर अपनी सैन्य तैयारी का प्रदर्शन किया है.
ईरान की जनता के बीच इस वार्ता को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया है. जहां कुछ लोग युद्ध के साये और आर्थिक दबाव से मुक्ति की उम्मीद कर रहे हैं, वहीं देश में हालिया विरोध प्रदर्शनों और भारी महंगाई से जूझ रहे कई नागरिक भविष्य को लेकर सशंकित हैं.