SC: शॉर्ट सर्विस कमीशन महिला अधिकारियों को मिलेगी पूरी पेंशन
नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को एक युगांतरकारी निर्णय सुनाते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना की उन महिला शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) अधिकारियों को बड़ी राहत दी है, जिन्हें 'मनमाने मूल्यांकन' के कारण स्थायी कमीशन से वंचित कर दिया गया था.
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति उज्ज्वल भुइयां और न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि ये महिला अधिकारी पूर्ण पेंशन लाभ की हकदार हैं.
अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी असाधारण शक्तियों का उपयोग करते हुए निर्देश दिया कि 2019 से 2021 के बीच चयन बोर्ड में शामिल होने वाली सभी महिला अधिकारियों को 20 साल की न्यूनतम सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा (डीम्ड), भले ही वे वास्तव में इससे पहले सेवामुक्त हो गई हों.
पीठ ने सुनवाई के दौरान सैन्य मूल्यांकन प्रक्रिया पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि महिला अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (ACR) अक्सर इस धारणा के साथ 'कैजुअल' तरीके से लिखी गई कि वे करियर में आगे नहीं बढ़ेंगी, जिससे उनकी योग्यता प्रभावित हुई.
वायुसेना के संदर्भ में कोर्ट ने 2019 में लागू किए गए सेवा मानदंडों को जल्दबाजी में उठाया गया कदम बताया.
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने 'परिचालन प्रभावशीलता' (Operational Effectiveness) का हवाला देते हुए इन अधिकारियों की दोबारा बहाली से इनकार कर दिया है, लेकिन जोर देकर कहा कि परिचालन संबंधी कारणों को वित्तीय लाभ रोकने का आधार नहीं बनाया जा सकता.
अदालत ने साफ किया कि इन अधिकारियों की पेंशन 1 नवंबर, 2025 से प्रभावी होगी, हालांकि विंग कमांडर रैंक पर काल्पनिक टाइम-स्केल प्रमोशन की याचिका को खारिज कर दिया गया है.