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SC से सुरेंद्र कोली को मिली राहत: निठारी हत्याकांड के सभी केस खत्म

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11 नव. 2025, 05:52 PM 3 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली । डेस्क: निठारी हत्याकांड से जुड़े आखिरी लंबित मामले में भी सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सुरेंद्र कोली को बड़ी राहत दी है. जस्टिस बी.आर. गवई, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने कोली की Curative याचिका को स्वीकार करते हुए एक किशोरी के साथ बलात्कार और हत्या से जुड़े मामले में उसकी सज़ा को रद्द कर दिया.


इस आदेश के साथ ही, निठारी कांड से जुड़े सभी कानूनी मामले समाप्त हो गए हैं. यह घटना 29 दिसंबर, 2006 को नोएडा में व्यवसायी मनिंदर सिंह पंढेर के आवास के पीछे आठ बच्चों के कंकाल मिलने के बाद सामने आई थी. पंढेर के घर पर काम करने वाला कोली अपहरण, बलात्कार, अंग-भंग और शवों को नाले में ठिकाने लगाने का आरोपी था, जिसके संबंध में कुल 19 एफआईआर दर्ज की गई थीं.

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पहले सीबीआई कोर्ट ने कोली और पंढेर दोनों को कई मामलों में मौत की सज़ा सुनाई थी. हालांकि, अक्टूबर 2023 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को 12 और पंढेर को 2 मामलों में बरी कर दिया था. जनवरी 2015 में कोली की मौत की सज़ा को उम्रकैद में बदल दिया गया था. हाई कोर्ट के फैसले के बाद भी एक मामले में उम्रकैद बरकरार रहने के कारण कोली जेल में ही था.


सुप्रीम कोर्ट के इस ताजा निर्देश के बाद, उस शेष मामले में भी कोली की सज़ा रद्द कर दी गई है और उसकी रिहाई का आदेश दिया गया है. कानूनी जानकारों का कहना है कि यह निर्णय प्रक्रियागत देरी, लंबी अपीलों और उपचारात्मक याचिका के दौरान प्रस्तुत किए गए नए सबूतों के मूल्यांकन पर आधारित है.


निठारी हत्याकांड


स्थान: यह घटनाक्रम दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के नोएडा स्थित निठारी गाँव के पास, सेक्टर-31 में एक कोठी (D-5, निठारी) से जुड़ा है.


खुलासा: 29 दिसंबर 2006 को पुलिस को इस कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर के घर के पीछे नाले से बच्चों और महिलाओं के मानव कंकाल/हड्डियाँ मिली थीं. जाँच में कुल 19 नरकंकाल मिलने की बात सामने आई थी, जिससे पूरे देश में हड़कंप मच गया था.


आरोपी: इस मामले में कोठी के मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके घरेलू नौकर सुरेंद्र कोली को मुख्य आरोपी बनाया गया था.


आरोप: सुरेंद्र कोली पर अपहरण, बलात्कार, हत्या, शवों को क्षत-विक्षत करने और नाले में फेंकने जैसे जघन्य अपराधों के आरोप लगे थे. कुछ रिपोर्ट्स में नरभक्षण (Cannibalism) के आरोप भी शामिल थे.


पीड़ित: पीड़ित ज्यादातर बच्चे और युवतियाँ थीं, जिनकी उम्र 7 साल से लेकर 14 साल तक थी और जो 2005-2006 के दौरान निठारी इलाके से लापता हो गए थे.


अदालती कार्यवाही: सीबीआई कोर्ट ने दोनों आरोपियों को कई मामलों में दोषी ठहराया था और कोली को मौत की सज़ा सुनाई थी. हालांकि, बाद में इलाहाबाद हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने कई मामलों में कोली और पंढेर को सबूतों की कमी, प्रक्रियागत देरी और कमजोर जाँच के आधार पर बरी कर दिया.


यह मामला अपनी भयावहता के कारण भारतीय आपराधिक इतिहास के सबसे जघन्य और चर्चित मामलों में से एक बन गया.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP