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बंगाल में 'SIR डर' से आत्महत्याएं, ममता ने BJP पर साधा निशाना

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31 अक्टू. 2025, 02:39 AM 5 मिनट में पढ़ें 2

ममता बनर्जी
ममता बनर्जी

कोलकाता । डेस्क: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की घोषणा के बाद से ही डर का माहौल बन गया है. जिसके परिणामस्वरूप पिछले 72 घंटों में तीन लगातार घटनाएं हुई हैं और दो लोगों की मौत हो चुकी है. इन त्रासदियों को लेकर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों पर निशाना साधा. उन्होंने आम जनता को आश्वासन दिया कि वह उनके अधिकारों के लिए "आखिरी खून की बूंद तक" बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी.


लगातार हो रहीं मौतें, SIR पर बढ़ रहा डर

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सोमवार को राज्य में एसआईआर की घोषणा हुई. उसी रात उत्तर 24 परगना के पानीहाटी के 57 वर्षीय प्रदीप कर ने कथित तौर पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली. पुलिस को उनके कमरे से एक डायरी मिली जिसमें लिखा था, "मेरी मौत के लिए एनआरसी जिम्मेदार है."


इसके अगले दिन, कूचबिहार के दिनहाटा के 63 वर्षीय खइरुल शेख ने जहर खाकर आत्महत्या का प्रयास किया. उनके परिवार का दावा है कि 2002 की मतदाता सूची में उनके नाम की वर्तनी गलत थी, जिसके कारण वह SIR को लेकर आतंकित थे. उनका फिलहाल अस्पताल में इलाज चल रहा है.


तीसरी घटना गुरुवार को बीरभूम के इलमबाजार में हुई, जहां 95 वर्षीय क्षितिश मजूमदार की आत्महत्या की खबर आई. परिवार का आरोप है कि 2002 की सूची में अपना नाम न मिलने के डर से उन्होंने यह कदम उठाया.


ममता बनर्जी ने बीजेपी पर साधा निशाना

इन घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर लिखा, "हम बीजेपी की नफरत, डर और विभाजनकारी राजनीति के दुखद परिणामों के साक्षी बन रहे हैं. बंगाल में SIR की घोषणा के 72 घंटों के भीतर, लगातार ऐसी दुर्घटनाएं हो रही हैं जिन्हें आसानी से टाला जा सकता था." उन्होंने सवाल किया, "इसके लिए कौन जिम्मेदार है? क्या केंद्रीय गृह मंत्री इसकी जिम्मेदारी लेंगे? क्या बीजेपी और उसके सहयोगी, जिनकी निगरानी में यह डर का माहौल बना है, उनमें कुछ कहने की हिम्मत है?"


उन्होंने इलमबाजार के वृद्ध की मौत को "मानवता के साथ विश्वासघात" बताया और कहा, "पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोग सम्मान के साथ बंगाल में रह रहे हैं. अब उनकी जन्मभूमि पर सवाल उठाया जा रहा है! यह क्रूर और तर्कहीन है."


मुख्यमंत्री का जनता को आश्वासन

ममता बनर्जी ने नागरिकों को दिलासा देते हुए लिखा, "हर नागरिक से कह रही हूँ, विश्वास न खोएं. कोई भी चरम कदम न उठाएं. हमारी सरकार आपके साथ है. हम बंगाल में एनआरसी नहीं होने देंगे. न सामने के दरवाजे से और न ही पीछे के दरवाजे से. एक भी वैध नागरिक को हम 'बाहरी' का ठप्पा नहीं लगने देंगे." उन्होंने दृढ़ता से कहा कि वह "आखिरी खून की बूंद तक लोगों के अधिकारों के लिए लड़ेंगी" और बीजेपी तथा उसके सहयोगियों के मंसूबों को सफल नहीं होने देंगी.


SIR की घोषणा के बाद से ही तृणमूल कांग्रेस बीजेपी पर विभाजन की राजनीति का आरोप लगा रही है, जबकि केंद्र में सत्तारूढ़ दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि एसआईआर से वैध मतदाताओं के नाम किसी भी कीमत पर नहीं हटाए जाएंगे और तृणमूल अनावश्यक डर फैला रही है. इन तीन घटनाओं के बाद मुख्यमंत्री ने एक बार फिर बीजेपी पर हमला बोला है.


'SIR आतंक' पर बीजेपी का पलटवार: "ममता झूठी कहानी गढ़ रही हैं, डर फैलाना TMC की राजनीति"


मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा बीजेपी पर 'भय और विभाजन की राजनीति' का आरोप लगाए जाने के बाद, बीजेपी ने जोरदार पलटवार किया है. बीजेपी ने आरोप लगाया है कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) जानबूझकर "झूठ कहानी गढ़ रही है" और राजनीतिक लाभ के लिए आम जनता के बीच अनावश्यक आतंक पैदा कर रही है.


अनावश्यक डर फैलाने का आरोप: बीजेपी नेताओं ने ममता बनर्जी पर 'झूठे बयान' देकर और 'अफवाह' फैलाकर SIR को एनआरसी से जोड़ने का आरोप लगाया है. बीजेपी का कहना है कि SIR एक सामान्य प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य मतदाता सूची से अवैध मतदाताओं को हटाना और सूची को शुद्ध करना है. इससे किसी भी वैध नागरिक का नाम नहीं हटेगा.


इलमबाजार में 95 वर्षीय वृद्ध की आत्महत्या की घटना पर बीजेपी के एक नेता ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह क्षेत्र टीएमसी का गढ़ है और यहां स्थानीय नेताओं द्वारा उत्पीड़न आम बात है. उनका इशारा था कि आत्महत्या के पीछे केवल SIR का डर ही एकमात्र कारण नहीं हो सकता.


बीजेपी ने यह तर्क भी दिया कि अगर कोई व्यक्ति विभाजन के बाद भारतीय नागरिक नहीं था और बाद में भारत आ गया है, तो भी वह हिंदू होने के नाते नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) के तहत स्वतः ही नागरिकता के लिए पात्र है. बीजेपी का कहना है कि यह बात स्पष्ट करती है कि वैध नागरिकों को डरने की कोई जरूरत नहीं है.


बीजेपी ने बार-बार इस बात का खंडन किया है कि SIR राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का कोई 'पिछला दरवाजा' है. उन्होंने जोर देकर कहा कि दोनों प्रक्रियाएँ अलग हैं और ममता बनर्जी इन दोनों को जोड़कर सियासी बवाल खड़ा कर रही हैं.


बीजेपी ने ममता बनर्जी पर यह भी आरोप लगाया कि वह बांग्लादेशी घुसपैठियों को अपना वोट बैंक मानती हैं, और चूंकि SIR से अवैध मतदाताओं की पहचान होगी, इसलिए टीएमसी इसका विरोध करके "वोट की चोरी" सुनिश्चित करना चाहती है.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP