शनि, 17 अक्टू. 2026

CGKhabar

एक गांव में 15 लोगों ने की खुदकुशी की कोशिश, मचा हड़कंप

छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के इंदा गांव में आत्महत्या की कोशिश के मामलों ने हैरान कर दिया है

C

CG Khabar

26 मार्च 2025, 02:44 PM 5 मिनट में पढ़ें 1

 एक गांव में  15 लोगों ने की खुदकुशी की कोशिश, हड़कंप
एक गांव में 15 लोगों ने की खुदकुशी की कोशिश, हड़कंप

गरियाबंद | संवाददाताः छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का इंदा गांव इन दिनो काफी चर्चा में है. इस गांव की चर्चा किन्ही सुखद कारणों से नहीं बल्कि उस गांव पर टूटे दुःख के पहाड़ के चलते है. 


यहां अचानक से घट रही अत्महत्या की घटनाओं ने हड़कंप मचा दिया है.  

विज्ञापन


इंदा गांव में 20 दिनों के भीतर 15 लोग आत्महत्या की कोशिश कर चुके हैं, जिनमें से 3 अपने इरादे में सफल हो चुके हैं.


सभी घटनाएँ 3 मार्च से लेकर 21 मार्च के बीच हुई हैं. इसके चलते गांव में डर और आशंका का माहौल बना हुआ है. 


मैनपुर ब्लॉक के 3500 से ज्यादा की आबादी वाले इस गाँव के ग्रामीणों का कहना है कि आत्महत्या की कोशिश करने वालों की संख्या 15 है, जिसमें से 3 की जान जा चुकी है. 


हलांकि प्रशासन का दावा है कि केवल 11 लोगों ने ऐसी कोशिश की थी. इन घटनाओं ने शासन प्रशासन की नाक में दम कर दिया है.

 

पूजा-पाठ कर रहे लोग

ये घटनाएँ अचानक क्यों बढ़ी हैं, इसका कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है. इसके बाद से प्रशासन ने गांव में काउंसलिंग शिविर भी लगाया है.


जबकि ग्रामीणों में इस कदर भय व्याप्त है कि वह इन घटनाओं से बचने के लिये पूजा-पाठ का सहारा ले रहे हैं.


गांव के पुजारी सुंदर के मुताबिक़ आत्महत्या के प्रयासों के कारण गाँव में डर का माहौल बना हुआ है. 


इस स्थिति से निपटने के लिए, ग्रामीणों ने देवी का आवाहन करके पूजा की है, ताकि शांति का माहौल बने और आत्महत्या जैसी घटनाएं न हों.


ग्रामीणों की हो रही काउंसलिंग

 मामला सामने आने के बाद, मैनपुर के SDM, SDOP और BMO द्वारा गाँव में शिविर लगाकर ग्रामीणों से बातचीत  की जा रही है. 


कहा जा रहा है कि अब तक 15 लोगों को आत्महत्या से बचाया जा चुका है.


CMHO गार्गी यदु का कहना है कि मनोवैज्ञानिक चिकित्सकों की एक टीम द्वारा यहां पर प्राथमिक काउंसलिंग की गई है. 


गांव में टीम का दोबारा दौरा किया जाएगा. गार्गी यदु ने कहा कि, आत्महत्या करने के प्रयास करने वालों की काउंसलिंग करने के अलावा, गाँव के हालातों का भी जायजा लिया जाएगा. 


यहाँ ग्रामीणों के बीच नशा पान भी एक समस्या है. NGO की भी मदद ली जाएगी.


बेरोजगारी प्रमुख कारण

सरपंच प्रतिनिधि के अनुसार गाँव में 12वीं पास बेरोजगार युवाओं की संख्या लगभग 300 के आसपास है. 


इनमें से आधे लोग आंध्र प्रदेश से मजदूरी करके लौट चुके हैं और कुछ अभी भी मजदूरी कर रहे हैं. आत्महत्या के प्रयास करने वाले ज्यादातर लोग विवाहित बेरोजगार हैं.


बेरोजगारी एक प्रमुख कारण है, जिसके चलते यहाँ के युवा नशे की ओर बढ़ रहे हैं. 


काम न होने से शारीरिक और मानसिक तनाव बढ़ रहा है, जिससे आत्महत्या के प्रयासों में वृद्धि हो रही है.


इंदागांव में आत्महत्या की घटनाओं में अचानक वृद्धि होने से ग्रामीणों में भय और चिंता का होना जायज है. 


प्रशासनिक प्रयासों को अपर्याप्त मानते हुए, ग्रामीण आत्म संतुष्टि के लिए देवी की शरण में जाकर उससे आशीर्वाद की कामना कर रहे हैं. 


प्रशासनिक अमला डटा

इसी बीच, प्रशासन ने स्वास्थ्य और मानसिक रोगों के उपचार के लिए शिविर आयोजित किए हैं.


मामले की गंभीरता को देखते हुए गरियाबंद जिला मुख्यालय से इस गांव में लगातार प्रशासनिक अमला पहुंच रहा है.


डॉक्टरों की टीम ने गांव में शिविर लगाया. अधिकारी, कर्मचारियों ने जब गांव में बैठक लेकर ग्रामीणों से आत्महत्या के कारणों के बारे में चर्चा की, तो कई मामले सामने आए.


ग्रामीण गिना रहे गांव की समस्याएं

ग्रामीण आत्महत्या के मामले सामने आने के बाद गांव की प्रमुख समस्याओं को इसकी वजह बता रहे हैं. 


ग्रामीण स्कूल, अस्पताल, बैंक के अलावा गांव में पिछले 4 पीढ़ी से खेती कर रहे किसानों को जमीन का अब तक पट्टा नहीं मिलना और बेरोजगारी को इसकी प्रमुख वजह बताने में लगे हुए हैं. 


इंदा गाँव की समस्याएँ प्रशासन और समाज के लिए गंभीर चुनौती बन चुकी हैं. इन समस्याओं का जल्द समाधान न होने पर आत्महत्या के प्रयासों में और वृद्धि हो सकती है.


सरकार को सर्वे कराना चाहिए- मिश्रा

अंधश्रद्धा निर्मूलन अभियान के डॉ दिनेश मिश्रा कहते हैं कि आत्महत्या को किसी पूजा पाठ से नहीं रोका जा सकता लेकिन जब कुछ नहीं समझ में आता तो इंसान डर के मारे कुछ भी करने को तैयार हो जाता है. 


गांव वालों की मनोदशा को लेकर प्रशासन को काम करना चाहिए. 


इसके साथ ही आसपास के गांवों में भी सर्वे कराकर पता लगाना चाहिए कि इन गांवों में कितने बेरोजगार हैं. 


सरकार लोगों की समस्याओं को जानकर, उनकी मानसिक स्थिति का उपचार कर, उन्हें रोजगार उपलब्ध कराकर इन घटनाओं के घटित होने पर रोक लगा सकती है.

 

आत्महत्या के मामले में छतीसगढ़ 

राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक हमारे देश में प्रत्येक वर्ष 1,00,000 से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं. 


आत्महत्या के कारणों में व्यवसाय/रोजगार संबंधी समस्यायें, अकेलापन, शोषण, हिंसा, पारिवारिक समस्याएं, मानसिक रोग, नशे की लत, वित्तीय हानि, लंबे समय से चल रही तकलीफें शामिल होती हैं.


राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो एनसीआरबी द्वारा जारी किए गए अंतिम वार्षिक आंकड़े यानि 2022 के मुताबिक छतीसगढ़ शीर्ष 5 राज्यों में शामिल था. 


साल 2022 के दौरान राज्य व केंद्रशासित प्रदेश वार आत्महत्या के मामले में छतीसगढ़ की दर 4.9 प्रतिशत थी. वहीं 2022 के दौरान छतीसगढ़ में आत्महत्या करने वालों की कुल संख्या 8446 थी.


छतीसगढ़ 2020 से 2022 तक उच्चतर आत्महत्या दर वाले राज्यों में शामिल था जिसकी दर 26.4 थी.

 

मनोचिकित्सकों का कहना

जब कोई शख़्स आत्महत्या करने के बारे में सोचने लगता है तो इस स्थिति को मनोचिकित्सक सुसाइडल आइडिएशन (आत्महत्या का ख्याल) कहते हैं. 


ज़रूरी नहीं है कि किसी एक वजह से ऐसा हो. विशेषज्ञों की राय में जब व्यक्ति को किसी मुश्किल से निकलने का कोई रास्ता नहीं मिलता है, तो वो अपना जीवन ख़त्म करने के बारे में सोचने लगता है.


मनोचिकित्सक मानते हैं कि आत्महत्या की सबसे बड़ी वजह यह खयाल आना कि अब जीवन में कुछ भी नहीं बचा है.


यही वजह है कि अवसादग्रस्त लोगों में आत्महत्या करने की दर सबसे ज़्यादा देखी गई है.


खुदकुशी एक त्रासदी

मानव समाज में आत्महत्या एक ऐसी त्रासदी है, जो किसी के भी जीवन को न केवल समय से पहले खत्म कर देती है, बल्कि इसका प्रभाव परिवारों, दोस्तों और समुदायों के जीवन पर बना रहता है.


ज़ाहिर है, एकाएक हो रही आत्महत्या और इसके प्रयास से इंदा गांव में भी त्रासदी जैसी स्थिति निर्मित हो गई है.
 

यह खबर शेयर करें: WhatsApp Facebook
CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP