हिसार में 'सामाजिक पंचायत' का फरमान: लव मैरिज करने वालों का सामाजिक बहिष्कार
हिसार । डेस्क: हरियाणा के हिसार जिले के आर्यनगर गांव से एक 'सामाजिक पंचायत' ने प्रेम विवाह के खिलाफ कड़ा रुख अपनाते हुए बहिष्कार का प्रस्ताव पारित किया है. इस फैसले के तहत गांव में लव मैरिज करने वाले जोड़ों के साथ-साथ उनका समर्थन करने वाले परिवार के सदस्यों और अन्य लोगों का भी पूर्ण रूप से सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा. हालांकि, गांव की चुनी हुई ग्राम पंचायत ने इस फैसले से पूरी तरह दूरी बनाते हुए स्पष्ट किया है कि इस सामाजिक पंचायत के फैसले से उनका कोई लेना-देना नहीं है.
यह विवाद गांव में हाल ही में हुए तीन प्रेम विवाहों के बाद शुरू हुआ. आर्यनगर में बुजुर्गों की एक विशेष सभा बुलाई गई, जिसमें लगभग 1,000 ग्रामीण शामिल हुए. इस सभा में सर्वसम्मति से लव मैरिज का समर्थन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने और उन्हें समाज से बाहर करने का प्रस्ताव पास किया गया.
जिन तीन जोड़ों ने शादी की थी, उनमें से दो अंतरजातीय और एक समान जाति के थे. समान जाति में विवाह होने के बावजूद पंचायत ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया, क्योंकि यह प्रेम विवाह था.
ग्राम के बुजुर्ग कुलवंत गोसला की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में एक विशेष कमेटी बनाने का भी सुझाव दिया गया है. यह कमेटी घर-घर जाकर ग्रामीणों से संपर्क करेगी और इस प्रतिबंध पर उनकी राय लेगी. बैठक में मौजूद आर्यनगर के सरपंच रतन सिंह ने साफ किया कि इस फैसले में आधिकारिक ग्राम पंचायत की कोई भूमिका नहीं है.
वहीं, फैसले का समर्थन करते हुए ग्रामीण भजनलाल ने तर्क दिया कि गांव के लोग हर लड़की को अपनी बेटी मानते हैं और लव मैरिज की यह परंपरा उनकी सदियों पुरानी सामाजिक संस्कृति और मर्यादाओं के खिलाफ है.
इस फरमान की खबर फैलते ही पुलिस और कानूनी विशेषज्ञ हरकत में आ गए हैं. हिसार के पुलिस अधीक्षक सिद्धांत जैन ने मामले की जांच के आदेश देते हुए आश्वासन दिया है कि यदि किसी भी शादीशुदा जोड़े को कोई धमकी मिलती है, तो पुलिस उन्हें पूरी सुरक्षा मुहैया कराएगी.
वहीं, वरिष्ठ वकील कमल आनंद के अनुसार, भारतीय संविधान का अनुच्छेद 21 हर बालिग नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार देता है. सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाने वाली ऐसी पंचायतों के पास कोई कानूनी मान्यता नहीं है और उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है.