शेख हसीना ने कहा- मेरे कार्यकाल में भी कुछ चुनाव समावेशी नहीं थे
नई दिल्ली । डेस्क: भारत में मौजूद बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने समाचार एजेंसी 'एपी' को दिए एक ईमेल इंटरव्यू में वर्तमान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार की तीखी आलोचना की है. हसीना ने स्वीकार किया कि उनके शासनकाल के दौरान भी कुछ चुनाव 'पूरी तरह समावेशी' नहीं थे, लेकिन उन्होंने इसका कारण विपक्षी दलों द्वारा चुनाव का बहिष्कार करना बताया.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि जब तक राजनीतिक दलों पर प्रतिबंध लगाने या चुनाव बहिष्कार की परंपरा नहीं बदलती, तब तक बांग्लादेश की उन्नति संभव नहीं है.
आगामी 12 फरवरी को बांग्लादेश में होने वाले आम चुनावों से पहले हसीना ने अपनी पार्टी 'अवामी लीग' को प्रतिबंधित किए जाने पर गहरा रोष व्यक्त किया.
उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि जब आबादी के एक बड़े हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित कर दिया जाता है, तो आक्रोश बढ़ता है और अस्थिरता पैदा होती है.
हसीना के अनुसार, बाहर से थोपी गई या अलोकतांत्रिक तरीके से बनी सरकार एक विभाजित राष्ट्र को कभी एकजुट नहीं कर सकती. उन्होंने जोर देकर कहा कि बांग्लादेश को एक ऐसी वैध सरकार की आवश्यकता है जो 'जनता की वास्तविक सहमति' से चले.
दूसरी ओर, यूनुस सरकार ने इन आरोपों के बीच शांतिपूर्ण मतदान का आश्वासन दिया है. मुख्य निर्वाचन आयोग और सरकार का कहना है कि 500 से अधिक विदेशी पर्यवेक्षक इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेंगे ताकि निष्पक्षता बनी रहे.
हालांकि, अवामी लीग के चुनाव से बाहर रहने के कारण इस लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर लगातार सवाल उठ रहे हैं.