शेख हसीना का भारत में निर्वासन के एक साल
नई दिल्ली । डेस्क: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को भारत में निर्वासन में एक साल पूरा हो चुका है. पिछले साल 5 अगस्त 2024 को ढाका में भारी विरोध प्रदर्शनों के बीच उन्हें देश छोड़कर भागना पड़ा था. अब वह नई दिल्ली में एक सुरक्षित आवास में रह रही हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक गतिविधियों और भविष्य को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है.
भारत सरकार ने उन्हें सुरक्षा प्रदान की है, लेकिन उनकी गतिविधियों पर अंकुश लगाने की कोशिश की है, जिससे भारत-बांग्लादेश संबंधों में तनाव का एक नया आयाम जुड़ा है.
शेख हसीना 5 अगस्त 2024 को ढाका में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों के बीच हेलीकॉप्टर से ढाका के हवाई अड्डे पहुंचीं और फिर बांग्लादेश वायुसेना के सी-130 हरक्यूलिस विमान से भारत के हिंडन हवाई अड्डे पर उतरीं. शुरू में यह माना गया कि उनका भारत में ठहराव अस्थायी होगा. सूत्रों के अनुसार, हसीना ने यूनाइटेड किंगडम में शरण के लिए आवेदन किया था, लेकिन यूके की नवनिर्वाचित लेबर सरकार ने, वहां चल रहे आप्रवासी विरोधी दंगों के बीच, उनके आवेदन को अस्वीकार कर दिया.
इसके बाद भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल की सलाह पर हसीना को दिल्ली में रहने की अनुमति दी गई. यह निर्णय 1975 के उस फैसले की याद दिलाता है, जब इंदिरा गांधी सरकार ने हसीना और उनकी बहन को उनके परिवार की हत्या के बाद शरण दी थी.
हसीना अब दिल्ली के एक सुरक्षित आवास में रह रही हैं. उनकी बेटी सायमा वाजेद, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र की क्षेत्रीय निदेशक थीं, भी उनके साथ दिल्ली में हैं. सायमा को हाल ही में बांग्लादेश में दर्ज मुकदमों के कारण अनिश्चितकालीन अवकाश पर भेज दिया गया.
भारत के विदेश मंत्रालय ने हसीना के ठहरने के बारे में कोई विस्तृत जानकारी साझा करने से इनकार किया है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने अक्टूबर 2024 में कहा था, "हसीना सुरक्षा कारणों से कम समय की सूचना पर भारत आई थीं और अभी भी यहीं हैं."
हसीना के खिलाफ बांग्लादेश में भ्रष्टाचार, मानवाधिकार उल्लंघन और यहां तक कि युद्ध अपराधों के आरोप लगाये गये हैं, जिसके कारण उनके ढाका लौटने की संभावना फिलहाल कम है.
बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने पहले कहा था कि वह अवामी लीग को 2026 में होने वाले चुनावों में भाग लेने से नहीं रोकेंगे, लेकिन बाद में अवामी लीग और इसके छात्र संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जिससे उनकी चुनावी भागीदारी असंभव हो गई.
पिछले एक साल में, हसीना ने अपने समर्थकों के लिए कई रिकॉर्डेड ऑडियो संदेश भेजे हैं और एक बार ढाका में अपने समर्थकों के लिए एक लाइव "रैली" को संबोधित किया. हालांकि, यह रैली हिंसक हो गई, जब सत्ता में आए छात्र समूहों ने हसीना के परिवार के घर और उनके पिता शेख मुजीबुर रहमान के स्मारक संग्रहालय पर हमला कर दिया और उसे जला दिया.
हसीना ने अपने संबोधन में कहा, "एक इमारत को नष्ट करने से केवल संरचना नष्ट हो सकती है, इतिहास को मिटाया नहीं जा सकता." इसके बाद, भारत सरकार ने बांग्लादेश की यूनुस प्रशासन के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने और ढाका से एक कूटनीतिक नोट के बाद हसीना से अपनी राजनीतिक गतिविधियों को कम करने का अनुरोध किया.
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा, "शेख हसीना के बयान उनकी व्यक्तिगत क्षमता में हैं, जिनमें भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं है. इसे भारत सरकार की स्थिति के साथ जोड़ना द्विपक्षीय संबंधों में सकारात्मकता नहीं जोड़ेगा." फिर भी, हसीना का भारत में रहना ढाका और दिल्ली के बीच एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है.
23 जुलाई 2025 को, अवामी लीग के पांच मंत्रियों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित करने की योजना बनाई थी, लेकिन भारत के विदेश मंत्रालय के हस्तक्षेप के बाद इसे रद्द कर दिया गया.
यह कदम भारत की उस नीति को दर्शाता है, जिसमें वह हसीना और उनके समर्थकों को भारत में खुले तौर पर राजनीतिक गतिविधियों से रोक रहा है.
हसीना का निर्वासन भारत-बांग्लादेश संबंधों के लिए एक जटिल चुनौती बना हुआ है. 1981 में ढाका लौटकर उन्होंने अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाया था और 1996, 2009 से 2024 तक चार बार सत्ता में रहीं.
हालांकि, वर्तमान में उनके देश लौटने, सक्रिय राजनीति में भाग लेने या सत्ता में वापसी की संभावना कम दिखाई देती है. बांग्लादेश में 2026 में होने वाले चुनावों और वहां की बदलती राजनीतिक स्थिति उनके भविष्य को और अनिश्चित बनाती है.