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लिव-इन रिलेशनशिप से अलग होना अपराध नहीं: सुप्रीम कोर्ट

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27 अप्रै. 2026, 02:48 PM 2 मिनट में पढ़ें 1

सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली । डेस्क: उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया है कि यदि दो वयस्क अपनी मर्जी से बिना विवाह के साथ रहते हैं (लिव-इन रिलेशनशिप), तो उनमें से किसी एक साथी का रिश्ते से बाहर निकल जाना 'अपराध' की श्रेणी में नहीं आता. 


कोर्ट ने टिप्पणी की कि विवाह के कानूनी बंधन के बिना रहने वाले जोड़ों को इस तरह के रिश्तों में निहित अनिश्चितताओं और स्वाभाविक जोखिमों को स्वीकार करना चाहिए.


यह अवलोकन न्यायमूर्ति नागरत्ना की पीठ ने एक महिला की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया, जिसने अपने साथी पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म और शारीरिक शोषण का आरोप लगाया था. महिला का दावा था कि आरोपी ने लंबे समय तक साथ रहने और एक बच्चा होने के बाद उसे छोड़ दिया. 


इस पर कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए सवाल किया कि दो वयस्कों की सहमति से बना दीर्घकालिक रिश्ता केवल अलगाव के आधार पर यौन उत्पीड़न के आरोप में कैसे बदल सकता है? 


अदालत ने साफ कहा कि शादी का वादा टूटना या संबंध विच्छेद होना हर मामले में 'दुष्कर्म' नहीं माना जा सकता. 


हालांकि, न्यायालय ने महिला के प्रति सहानुभूति जताते हुए कहा कि वह बच्चे के भरण-पोषण और गुजारा भत्ते के लिए दावा कर सकती है. कोर्ट ने अंत में जोर देकर कहा कि भले ही रिश्तों की कानूनी स्थिति अलग हो, लेकिन ऐसे संबंधों से पैदा हुए बच्चे कभी 'अवैध' नहीं होते.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP