रवि, 18 अक्टू. 2026

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'हम देखेंगे' का पाठ करने पर राजद्रोह का मामला दर्ज

छत्तीसगढ़ नागपुर में हम देखेंगे नज्म पढ़ने पर एफआईआर

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22 मई 2025, 02:40 AM 4 मिनट में पढ़ें 1

वीरा साथीदार
वीरा साथीदार

नागपुर | डेस्कः नागपुर के रहने वाले दत्तात्रेय शिर्के ने पुलिस थाने में यह आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई कि वीरा साथीदार की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में भड़काऊ बयान दिया गया था."


शिर्के कहते हैं कि "वीडियो में एक व्यक्ति ने आपत्तिजनक बयान देते हुए कहा- जिस गाने से सरकार हिल गई थी, उसी से इस सिंहासन को हिलाने की ज़रूरत है.

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हम फासीवाद के युग में रह रहे हैं. यह युग अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को छीन रहा है. यह युग तानाशाही का है."


मजेदार यह है कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देने वाले शिर्के खुद अभिव्यक्ति को लेकर शिकायत दर्ज कराते हैं और पुलिस बिना देरी किये मामला दर्ज करती है.


क्या है मामला

दरअसल जाने-माने आंबेडकरवादी सामाजिक कार्यकर्ता वीरा साथीदार की याद में बीते 13 मई को महाराष्ट्र के नागपुर में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया था.


इसी कार्यक्रम में फ़ैज़ की कविता ‘हम देखेंगे’ का पाठ किया गया था.


इस कार्यक्रम का आयोजन वीरा साथीदार की पत्नी पुष्पा ने किया था. पुलिस ने शिकायत के आधार पर आयोजकों और अन्य लोगों पर जो मामला दर्ज किया, उसमें राजद्रोह की धारा भी जोड़ दी.


इस मामले पर सोशल मीडिया में आयोजकों के पक्ष में और पुलिस की कार्यवाही के खिलाफ लोग आवाज उठा रहे हैं. सवाल उठ रहा है कि कविता का पाठ कैसे राजद्रोह का मामला हो गया.


नागपुर में वीरा साथीदार स्मृति समन्वय समिति और समता कला मंच ने विदर्भ हिंदी साहित्य संघ भवन में एक सभा का आयोजन किया था.


जन संघर्ष समिति नाम के एक स्थानीय संगठन के अध्यक्ष दत्तात्रेय शिर्के ने 16 मई को सीताबर्डी पुलिस थाने में कार्यक्रम की आयोजक वीरा साथीदार की पत्नी पुष्पा और वहां मौजूद कलाकारों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज कराई थी.


शिर्के ने शिकायत में कार्यक्रम के दौरान 'भड़काऊ और आपत्तिजनक' बयान देने के आरोप लगाए हैं.


इसमें कहा गया है कि वीरा साथीदार की याद में आयोजित एक कार्यक्रम में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की एक कविता पढ़ी गई. शिर्के ने कहा कि कविता में 'सब ताज उछाले जाएंगे, सब तख़्त गिराए जाएंगे ' जैसे बोल हैं.


शिर्के ने इस कार्यक्रम का वीडियो यूट्यूब पर देखा और फिर शिकायत दर्ज कराई.


इन धाराओं में मामला दर्ज

पुलिस के अनुसार शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि वीरा साथीदार की स्मृति में आयोजित एक कार्यक्रम में भड़काऊ बयान दिया गया था."


पुलिस के मुताबिक शिकायत में कहा है कि इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करके आयोजकों ने जानबूझकर जनता को गुमराह करने और देश की संप्रभुता को ख़तरे में डालने का असंवैधानिक काम किया है.


शिकायत के आधार पर कार्यक्रम की आयोजक पुष्पा वीरा साथीदार, एक अज्ञात व्यक्ति और एक अज्ञात महिला समेत अन्य लोगों के ख़िलाफ़ बीएनएस की धारा 152, 196, 353, 3(5) के तहत मामला दर्ज किया गया है.


धारा 152 राजद्रोह से संबंधित है. धारा 196 धर्म, जाति, भाषा, जन्म स्थान, निवास आदि के आधार पर विभिन्न समूहों के बीच शत्रुता पैदा करने और शांति में बाधा पैदा करने से जुड़ी है.


धारा 353 शांति भंग करने और अफ़वाह फैलाने की संभावना या ऐसे किसी कार्य या टिप्पणी जिससे क़ानून व्यवस्था बाधित हो, से संबंधित है.


कौन हैं वीरा साथीदार?

वीरा साथीदार महाराष्ट्र के जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता थे. कोविड के चलते 2021 में उनका निधन हो गया था.


उन्होंने मराठी फिल्म 'कोर्ट' में नारायण कांबले की मुख्य भूमिका भी निभाई थी. यह फिल्म काफी सराही गयी और इसे राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.


वर्धा ज़िले के जोगीनगर में अपना बचपन बिताने वाले वीरा साथीदार का असली नाम विजय वैरागड़े था. वह सत्तर के दशक से ही आंबेडकरवादी आंदोलन से जुड़ गए थे.


सामाजिक आंदोलनों में हिस्सा लेने की वजह से उन्होंने अपना सरनेम छोड़ दिया था और वीरा साथीदार कहलाने लगे.


वीरा साथीदार ने 'विद्रोही' नामक पत्रिका का संपादन किया था. उन्होंने पत्रकार के रूप में भी कार्य किया. वह 'रिपब्लिकन पैंथर' संगठन के माध्यम से दलितों के बीच काम कर रहे थे.


सत्ता से सवाल पूछने वाले फ़ैज़

1911 में जन्मे फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ (1911एक प्रसिद्ध उर्दू शायर थे. उनकी लिखी कविताएं, नज़्में आज भी बेहद लोकप्रिय हैं.


फ़ैज़ अपनी रचनाओं के माध्यम से सत्ता से सवाल पूछने में संकोच नहीं करते थे. उनकी लिखी प्रसिद्ध कविता 'हम देखेंगे' उनमें से एक है.


दरअसल, 1979 में लिखी गई इस कविता में पाकिस्तान की तत्कालीन सरकार का संदर्भ था. पाकिस्तान में ये सैन्य तानाशाह ज़िया-उल-हक़ का दौर था.


1977 में जनरल ज़िया के सत्ता में आने के बाद फ़ैज़ को पाकिस्तान छोड़ना पड़ा और उन्होंने चार वर्षों तक बेरूत में निर्वासन का जीवन बिताया.


फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ का 1984 में निधन हो गया था.

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CGKhabar — Editor: Raghvendra Chand Singh, Raipur, Chhattisgarh. Managed by Space IX Media LLP