चीन: 'शीत युद्ध मानसिकता' को दूर करने क्षेत्रीय सहयोग का आह्वान
नई दिल्ली । डेस्क: चीन ने कहा है कि वैश्विक व्यापार में अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य में अस्थिरता के बीच क्षेत्रीय एकजुटता महत्वपूर्ण है. यह बयान तब आया जब चीन 31 अगस्त और 1 सितंबर को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने की तैयारी कर रहा है.
इस शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग करेंगे, जिसमें 20 से अधिक विश्व नेता भाग लेंगे, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस शामिल हैं. बेलारूस, आर्मेनिया, मलेशिया, नेपाल, तुर्की और मिस्र जैसे देशों के नेता भी इस सम्मेलन में शामिल होंगे.
चीन के सहायक विदेश मंत्री लियू बिन ने संवाददाताओं को जानकारी देते हुए कहा कि यह शिखर सम्मेलन "सांस्कृतिक युद्ध और शीत युद्ध मानसिकता" को दूर करने के लिए नई दृष्टि अपनाएगा, साथ ही विकास को बढ़ावा देने, सुरक्षा बनाए रखने और समृद्धि को प्रोत्साहित करने के लिए नए उपायों पर ध्यान देगा.
लियू ने कहा, "आज की दुनिया में, वर्चस्ववादी और शक्ति की राजनीति की पुरानी मानसिकता अभी भी प्रभावी है. कुछ देश अपने हितों को दूसरों से ऊपर रखने की कोशिश कर रहे हैं, जो विश्व शांति और स्थिरता के लिए गंभीर खतरा है." उन्होंने किसी भी देश का नाम लिए बिना क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता पर जोर दिया.
शंघाई सहयोग संगठन का लक्ष्य स्थिरता के माध्यम से दीर्घकालिक शांति, सद्भाव और दोस्ती को बढ़ावा देना है, साथ ही अंतरराष्ट्रीय परिवेश में अनिश्चितताओं को संबोधित करना है. लियू ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन बहुपक्षीयता का अभ्यास करने और क्षेत्रीय स्थिरता की रक्षा करने पर केंद्रित होगा.