इमरान खान की मौत की अफवाह खारिज, सेना ने दिया 'प्रूफ ऑफ लाइफ'
इस्लामाबाद । डेस्क: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सेहत और जेल में उनकी स्थिति को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय स्तर पर सियासी पारा चढ़ गया है. अमेरिका में रह रहे पाकिस्तानी पत्रकार वजाहत सईद खान के उस सनसनीखेज दावे के बाद खलबली मच गई, जिसमें उन्होंने सैन्य सूत्रों के हवाले से आशंका जताई थी कि इमरान खान की जेल में मौत हो चुकी हो सकती है.
हालांकि, व्यापक अटकलों के बीच बाद में यह जानकारी सामने आई कि पाकिस्तान सेना के अंतर-सेवा जनसंपर्क (ISPR) ने पूर्व प्रधानमंत्री का 'प्रूफ ऑफ लाइफ' (जीवित होने का प्रमाण) जारी कर दिया है.
विवाद की शुरुआत तब हुई जब एमी-नॉमिनेटेड पत्रकार वजाहत सईद खान ने एक इंटरव्यू में दावा किया कि तीन वरिष्ठ सैन्य सूत्रों ने उन्हें इमरान खान के असामयिक निधन की बात कही थी. हालांकि, पत्रकार ने खुद यह साफ किया था कि इन सूत्रों के पास खबर की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करने का कोई जरिया नहीं था और उन्होंने यह बात अनौपचारिक चर्चाओं के आधार पर कही थी.
इसके बाद सेना द्वारा 'प्रूफ ऑफ लाइफ' जारी किए जाने पर भी पत्रकार ने आशंका जताई कि रावलपिंडी के जीएचक्यू द्वारा अदियाला जेल के भीतर इमरान खान पर 24 घंटे कड़ी निगरानी रखी जा रही है और उनके खिलाफ रणनीतिक षड्यंत्र खारिज नहीं किया जा सकता.
73 वर्षीय क्रिकेटर से राजनेता बने इमरान खान 5 अगस्त 2023 से जेल में बंद हैं और उनके खिलाफ कई कानूनी मामले लंबित हैं. वह फिलहाल £190-मिलियन के अल-कादिर ट्रस्ट भ्रष्टाचार मामले में 14 साल की जेल की सजा काट रहे हैं.
इसी मामले में उनकी पत्नी बुशरा बीबी को भी सजा सुनाई गई थी, जिसे दोनों ने उच्च अदालत में चुनौती दी है. इसके अलावा इमरान खान 9 मई 2023 को हुई हिंसक घटनाओं और सैन्य प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों से जुड़े मामलों में भी अदालती कार्यवाहियों का सामना कर रहे हैं.
पिछले कुछ समय से पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) के नेताओं और इमरान खान के परिजनों ने आरोप लगाया था कि शहबाज शरीफ सरकार उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री से मिलने की इजाजत नहीं दे रही है, जिससे उनकी सेहत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए थे.
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पीटीआई नेता सोहेल अफरीदी ने व्यापक जन-प्रदर्शन की चेतावनी दी है और पार्टी ने 27 सितंबर को इस्लामाबाद की ओर लॉन्ग मार्च की घोषणा की है.
वहीं दूसरी ओर, शहबाज शरीफ सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी दबाव गहराता जा रहा है; हाल ही में अमेरिका के 13 अमेरिकी सांसदों के एक द्विपक्षीय समूह ने विदेश मंत्री मार्को रुबियो को पत्र लिखकर इमरान खान और उनकी पत्नी की जेल स्थितियों का मुद्दा सीधे इस्लामाबाद के सामने उठाने की मांग की है.