'दोषसिद्धि से पहले जमानत अधिकार होना चाहिए, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा सर्वोपरि'
जयपुर । डेस्क: पूर्व मुख्य न्यायाधीश डी.वाई. चंद्रचूड़ ने न्याय प्रणाली और व्यक्तिगत स्वतंत्रता को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणी की. जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल में 'आइडियाज ऑफ जस्टिस' सत्र के दौरान वरिष्ठ पत्रकार वीर सांघवी के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि "दोषसिद्धि से पहले जमानत एक अधिकार होना चाहिए."
कार्यकर्ता उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत अर्जी खारिज होने से जुड़े सवाल पर पूर्व CJI ने स्पष्ट किया कि हालांकि कानून निर्दोषता के अनुमान पर आधारित है, लेकिन जहां राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा हो, वहां अदालत का कर्तव्य है कि वह मामले की गहराई से जांच करे. उन्होंने कहा कि यदि आरोपी के भागने, सबूतों से छेड़छाड़ करने या दोबारा अपराध करने की आशंका न हो, तो जमानत मिलनी चाहिए.
उन्होंने चिंता जताते हुए कहा, "अगर कोई पांच या सात साल तक विचाराधीन कैदी रहता है और अंत में निर्दोष साबित होता है, तो उस खोए हुए समय की भरपाई कैसे होगी?"
जस्टिस चंद्रचूड़ ने जिला और सत्र न्यायालयों द्वारा जमानत देने में संकोच पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि अक्सर जजों को यह डर रहता है कि जमानत देने पर उनकी ईमानदारी पर सवाल न उठाए जाएं. यही कारण है कि छोटे-छोटे जमानत मामले भी सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच रहे हैं. उन्होंने जोर दिया कि यदि त्वरित सुनवाई में देरी होती है, तो आरोपी जमानत का हकदार है.
पारदर्शिता बढ़ाने के लिए पूर्व CJI ने एक क्रांतिकारी सुझाव देते हुए कहा कि हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति (कॉलेजियम प्रणाली) में नागरिक समाज के प्रतिष्ठित व्यक्तियों को भी शामिल किया जाना चाहिए. इससे न्यायपालिका में जनता का विश्वास और मजबूत होगा.
अपने कार्यकाल के दौरान समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर करने और चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द करने जैसे ऐतिहासिक फैसलों का जिक्र करते हुए उन्होंने एक मलाल भी व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि आजादी के सात दशक बाद भी 'वैवाहिक बलात्कार' को अपराध घोषित नहीं किया जा सका है, जिसके लिए कानून में बदलाव की सख्त जरूरत है.
रिटायरमेंट के बाद किसी सरकारी पद को स्वीकार करने के सवाल पर जस्टिस चंद्रचूड़ ने मुस्कुराते हुए कहा कि वर्तमान में वह एक निजी नागरिक के रूप में अपने जीवन का आनंद ले रहे हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही को क्षेत्रीय भाषाओं में लाइव टेलीकास्ट करने की उपलब्धि पर भी खुशी जताई.