नारायणपुर में मंदिर परिसर में मिला दुर्लभ पैंगोलिन
नारायणपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में बखरूपाड़ा गांव में स्थित कोटगुदीन मंदिर परिसर में एक दुर्लभ पैंगोलिन (सल्लू सांप) के आ जाने से श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया. आमतौर पर इंसानों को नुकसान न पहुंचाने वाले इस शर्मीले और निशाचर जीव को देखकर मंदिर में मौजूद लोग घबरा गए. स्थानीय निवासियों ने बिना वक्त गंवाए तुरंत इसकी सूचना वन विभाग को दी.
सूचना मिलते ही वन विभाग की रेस्क्यू टीम तुरंत हरकत में आई और मौके पर पहुंचकर मुस्तैदी दिखाई. नारायणपुर के वन परिक्षेत्र अधिकारी इंद्र कुमार यादव ने बताया कि टीम ने बिना किसी नुकसान के पैंगोलिन को सुरक्षित पकड़ लिया है. स्वास्थ्य परीक्षण के बाद जीव को वापस उसके प्राकृतिक आवास यानी घने जंगल में सुरक्षित छोड़ दिया गया है.
वन अधिकारी ने पैंगोलिन को एक 'लुप्तप्राय प्रजाति' बताते हुए स्थानीय नागरिकों से अपील की है कि वे ऐसे वन्यजीवों को बिल्कुल भी नुकसान न पहुंचाएं. उन्होंने कहा कि अगर कोई भी जंगली जानवर रिहायशी इलाकों में प्रवेश करता है, तो कानून को हाथ में लेने के बजाय तुरंत वन विभाग के अधिकारियों को सूचित करें.
विशेषज्ञों के अनुसार, पैंगोलिन मुख्य रूप से चींटियों और दीमकों को अपना आहार बनाते हैं. इस तरह वे जंगलों में कीड़ों-मकोड़ों की आबादी को नियंत्रित कर पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं.
इस निशाचर स्तनधारी जीव की शारीरिक बनावट भी बेहद अनूठी होती है. जब भी इन्हें किसी शिकारी या खतरे का आभास होता है, तो ये अपने शरीर पर मौजूद केराटिन से बने कड़े शल्कों की मदद से खुद को एक गेंद की तरह सिकोड़ लेते हैं, जिससे कोई इन पर हमला नहीं कर पाता.
वन विभाग के अधिकारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि पैंगोलिन दुनिया में सबसे ज्यादा तस्करी किए जाने वाले स्तनधारी जीवों में से एक है. अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इसके मांस और शल्कों की भारी अवैध मांग रहती है.
हालांकि, वैज्ञानिक अनुसंधानों में यह पूरी तरह साबित हो चुका है कि इसके शल्कों में कोई औषधीय गुण नहीं होते, फिर भी अंधविश्वास और मोटी कमाई के चक्कर में इसका अवैध व्यापार धड़ल्ले से चल रहा है.
भारत में इस जीव को लुप्त होने से बचाने के लिए सबसे ऊंची कानूनी सुरक्षा दी गई है. वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की अनुसूची-I (Schedule I) के तहत पैंगोलिन को संरक्षित किया गया है. इसका शिकार करना, व्यापार करना या तस्करी करना पूरी तरह प्रतिबंधित है और ऐसा करने पर बेहद सख्त सजा व जुर्माने का प्रावधान है.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इसके व्यावसायिक व्यापार पर पूर्ण प्रतिबंध है. अधिकारियों ने बताया कि नारायणपुर के घने जंगलों में अब बेहद सीमित संख्या में ही पैंगोलिन बचे हैं, इसलिए इनका संरक्षण करना बेहद संवेदनशील और जरूरी हो गया है.