बारनवापारा अभयारण्य में ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर की दस्तक
बारनवापारा अभयारण्य में दुर्लभ ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर की दस्तक
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के जैव विविधता से भरपूर बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में पहली बार ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर (Black-capped Kingfisher) पाया गया है. यह छत्तीसगढ़ में इस प्रजाति का दूसरा पुष्ट रिकॉर्ड माना जा रहा है.
यह दुर्लभ और महत्वपूर्ण अवलोकन 29 दिसंबर 2025 की सुबह प्रख्यात बर्डर डॉ. दिलीप वर्मा द्वारा किया गया. डॉ. वर्मा ने पक्षी को फील्ड में देखा और उसके स्पष्ट फोटोग्राफिक साक्ष्य भी जुटाए, जिनके आधार पर इस रिकॉर्ड को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित किया गया है. बारनवापारा अभयारण्य से यह इस प्रजाति का पहला आधिकारिक और दस्तावेजीकृत रिकॉर्ड है.
विशेषज्ञों के अनुसार, यह अवलोकन केवल एक नई प्रजाति के जुड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे अभयारण्य की समृद्ध पारिस्थितिकी और जैव विविधता भी रेखांकित होती है. ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर को सामान्यतः तटीय इलाकों और मैंग्रोव क्षेत्रों से जुड़ा पक्षी माना जाता है.
ऐसे में छत्तीसगढ़ के आंतरिक भू-भाग में स्थित बारनवापारा वन्यजीव अभयारण्य में इसकी मौजूदगी यहाँ उपलब्ध जल-आधारित आवासों, अनुकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों और स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र की ओर संकेत करती है.
इससे पहले वर्ष 2024 में इस प्रजाति को कांगेर वैली राष्ट्रीय उद्यान में क्रोकोडाइल सर्वे के दौरान दर्ज किया गया था, जिसे छत्तीसगढ़ से ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर का पहला पुष्ट रिकॉर्ड माना गया था. बारनवापारा में मिला यह नया रिकॉर्ड राज्य में पक्षी-विविधता के बढ़ते दायरे को और मजबूत करता है.
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के रिकॉर्ड भविष्य में पक्षी-विविधता के अध्ययन, संरक्षण रणनीतियों के निर्माण और अभयारण्य प्रबंधन से जुड़े निर्णयों के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करेंगे. साथ ही यह खोज बारनवापारा अभयारण्य को पक्षी-प्रेमियों और शोधकर्ताओं के लिए और अधिक महत्वपूर्ण स्थल के रूप में स्थापित करती है.
ब्लैक-कैप्ड किंगफिशर (Black-capped Kingfisher):
वैज्ञानिक नाम: Halcyon pileata
पहचान: इस पक्षी के सिर पर चमकदार काला कैप (टोपी) होती है, शरीर का ऊपरी हिस्सा नीला, गर्दन व छाती सफेद और पंखों पर नीले-सफेद रंग का आकर्षक संयोजन दिखाई देता है. इसकी चोंच मोटी, लंबी और गहरे लाल रंग की होती है.
आकार: मध्यम आकार का किंगफिशर, लंबाई लगभग 28–30 सेंटीमीटर.
आवास: सामान्यतः तटीय क्षेत्र, मैंग्रोव वन, नदी-मुहाने, दलदली इलाके और झीलों के आसपास पाया जाता है.
भोजन: मछलियाँ, केकड़े, कीड़े-मकोड़े, मेंढक और छोटे सरीसृप.
वितरण: दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया में पाया जाता है; भारत में यह दुर्लभ और स्थानीय प्रवासी माना जाता है.
संरक्षण स्थिति: IUCN की रेड लिस्ट में Least Concern श्रेणी में शामिल, लेकिन कई क्षेत्रों में इसकी संख्या कम मानी जाती है.
विशेष महत्व: आंतरिक भू-भाग के जंगलों या अभयारण्यों में इसका दिखना उस क्षेत्र की अच्छी जल-आधारित पारिस्थितिकी और जैव विविधता का संकेत माना जाता है.