एम्सटर्डम में इजरायल के खिलाफ विरोध: गाज़ा हिंसा रोकने की उठी मांग
एम्सटर्डम में 20,000 से अधिक लोगों ने लाल कपड़े पहनकर गाज़ा में हिंसा और नीदरलैंड द्वारा इजरायल को हथियारों की आपूर्ति के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया.
नई दिल्ली । डेस्क: एम्सटर्डम की सड़कों पर रविवार को हजारों की संख्या में लोग लाल रंग के कपड़े पहनकर उतरे और गाज़ा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ जारी हिंसा की कड़ी निंदा की. इस प्रदर्शन में शामिल लोगों ने "स्टॉप द नरसंहार" लिखे हुए पोस्टर और बैनर हाथ में ले रखे थे.
आयोजकों के अनुसार, इस "रेड लाइन" विरोध प्रदर्शन में लगभग 20,000 लोग शामिल हुए, जिन्होंने डच सरकार से इजरायल के खिलाफ ठोस कार्रवाई करने की मांग की.
प्रदर्शन में शामिल 33 वर्षीय अमरीकी मूल के रोबोटिक्स इंजीनियर स्टीवन ईसिंजर ने कहा कि वह खुद यहूदी हैं और उनके रिश्तेदार इजरायल में रहते हैं, लेकिन वे फिलिस्तीन के समर्थन में और हिंसा के खिलाफ खड़े हैं. उन्होंने सरकार से इजरायल को हथियारों की आपूर्ति तुरंत रोकने की अपील की.
अक्टूबर 2023 में हमास के हमले के बाद दो साल तक चले युद्ध के बाद पिछले साल अक्टूबर में इजरायल और हमास के बीच एक नाजुक संघर्षविराम लागू हुआ था.
इसके बावजूद गाज़ा में गंभीर मानवीय संकट बना हुआ है, नियमित इजरायली हमले जारी हैं और कब्जा किए गए वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनियों के खिलाफ बसने वालों की हिंसा में बढ़ोतरी हुई है.
फ्रांस और बेल्जियम जैसे अन्य यूरोपीय देशों के विपरीत, नीदरलैंड ने अभी तक फिलिस्तीन राज्य को मान्यता नहीं दी है.
डच प्रधानमंत्री रोब जेटेन, जिन्होंने 2025 में एक संसदीय उम्मीदवार के रूप में ऐसे ही एक प्रदर्शन में भाग लिया था, ने इस बार कहा कि अब उनका इसमें शामिल होना अनुचित होगा.
सितंबर के अंत में, डच सरकार ने कब्जा किए गए फिलिस्तीनी क्षेत्रों में अवैध इजरायली बस्तियों के उत्पादों पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके जवाब में इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन सार ने डच राजनयिकों की मान्यता रद्द कर दी थी.
इस बीच, इजरायल की भागीदारी के संवेदनशील मुद्दे का हवाला देते हुए नीदरलैंड के सार्वजनिक प्रसारक एनपीओ ने 2027 यूरोविज़न सांग कॉन्टेस्ट से हटने का फैसला किया है.