पहली छमाही में निजी क्षेत्र की घोषणाएं 15 वर्षों में सबसे ज्यादा
नई दिल्ली । डेस्क: भारतीय निजी क्षेत्र ने अप्रैल-सितंबर 2025 में 9.95 लाख करोड़ रुपये के नए प्रोजेक्ट घोषित किए, जो पिछले वर्ष की समान अवधि से 30.4% अधिक है. इसमें भारतीय कंपनियों का योगदान 94% (9.35 लाख करोड़ रुपये) रहा, जो 15 वर्षों में दूसरा सबसे ऊंचा आंकड़ा है.
हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के प्रोजेक्ट घोषणाएं 1.51 लाख करोड़ रुपये पर सिमट गईं, जो 71% की गिरावट दर्शाती है और 15 वर्षों का न्यूनतम स्तर है.
विदेशी कंपनियों के निवेश प्रस्ताव भी 0.6 लाख करोड़ रुपये पर पहुंचे, जो 28% कम है और पांच वर्षों का सबसे निचला स्तर. वैश्विक स्तर पर FDI में 11% वृद्धि के बावजूद, भारत की आकर्षण क्षमता घटती नजर आ रही है.
यह वृद्धि निजी क्षेत्र की मजबूती को दर्शाती है, जहां 2023-24 की पहली छमाही में 9.54 लाख करोड़ रुपये का रिकॉर्ड स्तर छुआ गया था.
विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक सुधारों और कॉर्पोरेट निवेश में बढ़ोतरी से यह ट्रेंड जारी रह सकता है.
दूसरी ओर, सरकारी घोषणाओं में गिरावट बजट सीमाओं और प्राथमिकताओं में बदलाव का संकेत दे रही है.
विदेशी निवेश में कमी 2022-23 के 1.9 लाख करोड़ रुपये के चरम से लगातार घटती आ रही है, जो नीतिगत अनिश्चितताओं से जुड़ी हो सकती है.
संयुक्त राष्ट्र के डेटा के अनुसार, वैश्विक FDI 2023 में 3% बढ़ा था, लेकिन भारत इसमें पिछड़ता दिख रहा है.
अर्थशास्त्री सलाह दे रहे हैं कि विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए कर सुधारों और बुनियादी ढांचे में तेजी लानी होगी.
कुल मिलाकर, निजी क्षेत्र की अगुवाई से अर्थव्यवस्था को गति मिल रही है, लेकिन संतुलित विकास के लिए सरकारी और विदेशी भागीदारी जरूरी है.