जशपुर की आदिवासी महिलाओं के हुनर की कायल हुईं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू
रायपुर । डेस्क: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने झारखंड के गुमला में आयोजित अंतर्राज्यीय लोक सांस्कृतिक समागम ‘कार्तिक जात्रा’ के दौरान छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले की आदिवासी महिलाओं के कौशल और आत्मनिर्भरता की जमकर प्रशंसा की है. राष्ट्रपति ने 'जशक्राफ्ट' से जुड़ी महिलाओं के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके द्वारा तैयार किए गए आभूषण और पर्यावरण के अनुकूल उत्पाद महिला सशक्तिकरण का उत्कृष्ट उदाहरण हैं.
उन्होंने जशपुर वन मंडल के ग्राम कोटनपानी की वन प्रबंधन समिति 'शब्दमुंडा' के स्व-सहायता समूह द्वारा बनाए गए उत्पादों को आदिवासी रचनात्मकता और सांस्कृतिक संरक्षण का प्रतीक बताया.
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर जोर दिया कि युवा पीढ़ी को अपनी जनजातीय विरासत और पहचान को संजोते हुए विकास की ओर आगे बढ़ना चाहिए.
इस अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि राष्ट्रपति द्वारा की गई यह सराहना छत्तीसगढ़ के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने विश्वास जताया कि इस प्रोत्साहन से आदिवासी महिलाओं के आत्मविश्वास को बल मिलेगा और आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को मजबूती मिलेगी.
मुख्यमंत्री ने इस समागम को आदिवासी समुदायों को जोड़ने वाला एक सेतु बताया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 15 नवंबर को 'जनजातीय गौरव दिवस' के रूप में मनाए जाने के महत्व को भी रेखांकित किया.
इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के प्रतिनिधिमंडल द्वारा जशपुर की शिल्प परंपराओं और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसे व्यापक पहचान मिली है.