बस्तर में 600 साल पुरानी परंपरा 'गोंचा महापर्व' की तैयारियां पूरी
जगदलपुर । संवाददाता: बस्तर में विश्व प्रसिद्ध दशहरा पर्व के बाद सबसे बड़े उत्सव का दर्जा प्राप्त 'गोंचा महापर्व' की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं. 360 आरण्यक ब्राह्मण समाज द्वारा आयोजित किया जाने वाला यह 10 दिवसीय ऐतिहासिक पर्व इस वर्ष 15 जुलाई से शुरू होकर 25 जुलाई तक पूरी भव्यता के साथ मनाया जाएगा.
समाज के अध्यक्ष वेद प्रकाश पांडे के अनुसार, 15 जुलाई को नेत्रोत्सव के साथ इस महापर्व का विधिवत शंखनाद होगा, जिसके बाद लगातार 10 दिनों तक विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान संपन्न किए जाएंगे.
जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर मनाए जाने वाले इस उत्सव में भगवान जगन्नाथ, माता सुभद्रा और बलभद्र जी को आदिवासियों द्वारा निर्मित तीन विशालकाय नए रथों पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराया जाएगा. इस दौरान बस्तर की अनोखी परंपरा के तहत स्थानीय ग्रामीणों द्वारा बांस से बनाई गई विशेष 'तुपकी' चलाकर भगवान जगन्नाथ को सलामी दी जाएगी.
इस भव्य और ऐतिहासिक रथयात्रा को देखने के लिए हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालुओं के उमड़ने की उम्मीद है.
इतिहासकारों और जानकारों के मुताबिक, बस्तर में रथयात्रा की यह गौरवशाली परंपरा करीब 600 साल पुरानी है. बस्तर के तत्कालीन राजा महाराज पुरुषोत्तम देव पैदल यात्रा करके ओडिशा के पुरी पहुंचे थे, जहां पुरी के राजा गजपति ने उन्हें भगवान जगन्नाथ के मंदिर से माता सुभद्रा का रथ भेंट स्वरूप दिया था. तभी से बस्तर में इस भव्य गोंचा महापर्व को मनाने की परंपरा निरंतर चली आ रही है.
इस वर्ष के इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए गोंचा पर्व समिति द्वारा प्रदेश के मुख्यमंत्री को भी विशेष आमंत्रण भेजा गया है, जिस पर उन्होंने अपनी स्वीकृति दे दी है.