प्रभात मिश्रा बने छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष
रायपुर । संवाददाता: छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य की राजभाषा को अधिक सशक्त और प्रभावशाली बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रभात मिश्रा को छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. संस्कृति विभाग द्वारा इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया है.
जारी आदेश के अनुसार, राज्य शासन ने अपने निहित अधिकारों का प्रयोग करते हुए रायपुर निवासी प्रभात मिश्रा को उनके कार्यभार ग्रहण करने की तिथि से आगामी आदेश तक अस्थायी रूप से इस जिम्मेदारी के लिए नियुक्त किया है.
राजधानी रायपुर के टिकरापारा (नंदी चौक) के रहने वाले प्रभात मिश्रा को प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्रों में उनके व्यापक अनुभव के आधार पर यह महत्वपूर्ण पद सौंपा गया है.
शासन के इस कदम को छत्तीसगढ़ी और हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ शासकीय कार्यों में इनके प्रभावी उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है. उनकी नियुक्ति से भाषा के संरक्षण और संवर्धन से जुड़ी योजनाओं में नई गति आने की उम्मीद है.
गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ शासन ने 28 नवंबर 2007 को राजभाषा विधेयक पारित किया था, जिसे अब प्रतिवर्ष 'राजभाषा दिवस' के रूप में मनाया जाता है. आयोग ने आधिकारिक तौर पर 14 अगस्त 2008 से अपना कार्य प्रारंभ किया.
मुख्य उद्देश्य और कार्य:
संवैधानिक मान्यता: छत्तीसगढ़ी भाषा को भारतीय संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए निरंतर प्रयास करना.
प्रशासकीय उपयोग: राज्य के शासकीय कार्यों (राजकाज) में छत्तीसगढ़ी भाषा के उपयोग को बढ़ावा देना और इसे व्यावहारिक बनाना.
शिक्षा में समावेश: छत्तीसगढ़ी को त्रि-भाषायी फॉर्मूले के तहत प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के पाठ्यक्रम में एक विषय के रूप में शामिल करना.
प्रचार-प्रसार: भाषा की महत्ता को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सम्मेलनों और साहित्यिक कार्यक्रमों का आयोजन करना.
आयोग अपनी जिम्मेदारियों को निभाने के लिए कई विशिष्ट योजनाएं चलाता है:
बिजहा कार्यक्रम: इस कार्यक्रम का उद्देश्य छत्तीसगढ़ी के उन शब्दों को पुनर्जीवित और संग्रहित करना है जो धीरे-धीरे प्रचलन से बाहर हो रहे हैं या लुप्त हो रहे हैं.
माई कोठी योजना: इसके अंतर्गत छत्तीसगढ़ और छत्तीसगढ़ी भाषा में लिखे गए साहित्य, पांडुलिपियों और पुस्तकों का एकत्रीकरण व संरक्षण किया जाता है.
साहित्यकार सम्मेलन: विभिन्न संभागों में साहित्यकारों का सम्मेलन आयोजित करना ताकि स्थानीय लेखकों को मंच मिल सके और भाषा का विकास हो.
शब्दावली निर्माण: शासकीय कार्यों में सुगमता के लिए छत्तीसगढ़ी प्रशासनिक शब्दावली और शब्दकोश तैयार करना.