गलत मेडिकल रिपोर्ट से किशोरी पर पुलिसिया जुल्म, पुलिस ऑफिसर निलंबित
राजनांदगांव । संवाददाता: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के सोमनी थाना क्षेत्र में एक 14 साल की नाबालिग बच्ची को सिर्फ एक गलत मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर रातभर थाने में बिठाकर प्रताड़ित किया गया. इस संवेदनहीन कृत्य के बाद जब जनता और सियासी गलियारों में भारी आक्रोश फैला, तो प्रशासन को तुरंत बैकफुट पर आना पड़ा. मामले की गंभीरता को देखते हुए राजनांदगांव की एसपी अंकिता शर्मा ने सोमनी थाना प्रभारी (SHO) अरुण नामदेव और एक महिला कांस्टेबल राजश्री सिंह को तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है.
इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और लैब टेक्नीशियन के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई शुरू कर दी गई है.
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब 25 मई को नाबालिग लड़की को पेट में तेज दर्द की शिकायत के बाद सोमनी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया था. वहां डॉक्टरों और लैब स्टाफ ने कथित तौर पर एक बेहद गैर-जिम्मेदाराना प्रेगनेंसी टेस्ट किया, जिसकी रिपोर्ट 'पॉजिटिव' आई. बिना किसी गहन जांच के अस्पताल ने तुरंत पुलिस को इसकी सूचना दे दी, जिससे पोक्सो (POCSO) मामले का संदेह पैदा हुआ.
इसके बाद सक्रिय हुई सोमनी पुलिस ने मानवीय संवेदनाओं को ताक पर रखकर कार्रवाई शुरू की. परिजनों का आरोप है कि पुलिस नाबालिग को थाने ले आई और पूरी रात उससे यह दबाव बनाकर पूछताछ की जाती रही कि "इस घटना के लिए कौन जिम्मेदार है."
पीड़ित बच्ची लगातार रोती रही और खुद को बेकसूर बताती रही, लेकिन पुलिस का दिल नहीं पघला. बाद में जब राजनांदगांव में बच्ची की दोबारा सोनोग्राफी और यूरिन जांच कराई गई, तो सच्चाई सामने आई. लगातार चार अलग-अलग टेस्ट में रिपोर्ट पूरी तरह से 'नेगेटिव' आई, जिसने सोमनी स्वास्थ्य केंद्र की घोर लापरवाही और पुलिसिया ज्यादती की पोल खोलकर रख दी.
इस घटना ने अब राजनीतिक रूप ले लिया है. स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन से मुलाकात कर इसे मानवाधिकारों का हनन और सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइंस का खुला उल्लंघन बताया है. कांग्रेस नेताओं ने इसे पूरी तरह 'अमानवीय' करार देते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
वहीं, एसपी अंकिता शर्मा ने कहा है कि मामले की विभागीय जांच के आदेश दे दिए गए हैं. उन्होंने पीड़ित परिवार से व्यक्तिगत रूप से बात कर न्याय का भरोसा दिलाया है.
इसके साथ ही, इस दर्दनाक दौर से गुजरी मासूम बच्ची को इस मानसिक आघात से बाहर निकालने के लिए एक क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट के जरिए उचित काउंसलिंग की व्यवस्था भी की जा रही है. स्वास्थ्य विभाग ने भी कार्रवाई करते हुए चिकित्सा अधिकारी मौन्या साहू को वहां से हटा दिया है.